विचार / लेख
-डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी
भारत ने यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ 'भोत बड़ी वाली' डील कर ली. 18 साल की खींचतान ख़तम! ट्रम्पवा देख ले ! ....और दे धमकी टैरिफ की?
भारत और EU की इस डील को मदर ऑफ़ आल डील्स बोलते हैं क्योंकि इससे अब शॉपिंग में मज़ा आएगा — कई चीजें सस्ती होंगी। खासकर दवा-दारू और कारें!
- जर्मन-इटालियन कारें (BMW, Mercedes, Audi, Volkswagen, Ferrari जैसी लग्जरी कारों ) की कीमत में 20-50% तक कमी आ सकती है. अभी 100-110% तक ड्यूटी लगती है, अब काफी कम होगी. "अब तो BMW 5 सीरीज 50-60 लाख में आ जाएगी!"
- दारू वालों का जश्न होगा. बीयर, वाइन और स्पिरिट्स — जर्मन बीयर, फ्रेंच वाइन, स्कॉच व्हिस्की, इटालियन वाइन सस्ती होंगी. स्पिरिट्स पर ड्यूटी 40% तक कम होगी.
- खाने-पीने की चीजें — ऑलिव ऑयल, चॉकलेट, पास्ता, चीज़, फ्रूट जूस, प्रोसेस्ड फूड, मार्जरीन — ये सब यूरोपीय ब्रांड्स अब 10-30% सस्ते मिलेंगे.
- फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स — कई दवाइयाँ और हेल्थ प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे.
- टेक्सटाइल, लेदर, ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स (झींगा आदि) पर EU में ड्यूटी कम या जीरो होगी.
इन इंडस्ट्रीज में ऑर्डर बढ़ेंगे :
फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स, IT सर्विसेज — भारतीय कंपनियों को यूरोप में आसानी से बेचने का मौका।
EU से ज्यादा इन्वेस्टमेंट आएगा — फैक्ट्री, टेक्नोलॉजी, जॉब्स.
क्लाइमेट फंड से 500 मिलियन यूरो मदद → ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सस्टेनेबल इंडस्ट्री में फायदा.
कुल ट्रेड डबल होने का अनुमान भारत की इकोनॉमी तेज चलेगी.
प्रीमियम सामान अब अफोर्डेबल — कार, बीयर, चॉकलेट, ऑलिव ऑयल सस्ता.
एक्सपोर्ट जॉब्स बढ़ेंगे — टेक्सटाइल, लेदर, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग में अच्छी कमाई.
कंपटीशन बढ़ेगा क्वालिटी बेहतर, कीमतें रियलिस्टिक.
अगर बहुत सारे यूरोपीय सामान आए तो कुछ घरेलू इंडस्ट्रीज में शुरुआती दौर में नौकरियाँ कम हो सकती हैं (ट्रांजिशन पीरियड में सरकार प्रोटेक्शन देगी).
अभी तो पार्टी शुरू हुई है ... सुरूर आने में कुछ महीने लग सकते हैं.
नोट : अमेरिका ने नखरे चलते रहेंगे. ट्रम्प कभी तोला कभी माशा होते रहेंगे. बाकी तो जो है सो है ही!


