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बिहार चुनाव का एक बड़ा समीकरण, जिंदा लाख का, मरा सवा लाख का...
26-Oct-2025 7:25 PM
बिहार चुनाव का एक बड़ा समीकरण, जिंदा लाख का, मरा सवा लाख का...

- अनिल गोस्वामी

बिहार में दो गठबंधन चुनाव लड़ रहे हैं। एनडीए में प्रमुख जनता दल यूनाइटेड और भाजपा है। दोनों दल बहुमत के आंकड़े से भी कम सीटें लड़ रहे हैं।

इसलिए एनडीए की सरकार बनने पर मिली जुली सरकार बनेगी। यह तय बात है।

महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस प्रमुख रूप से भागीदार हैं, साथ में माले भी। आरजेडी बहुमत के आंकड़े से ज्यादा सीटें लड़ रही है, 143+ सीटें लड़ने वाले से उम्मीद की जा सकती है वो बहुमत प्राप्त कर सकता है। लेकिन आरजेडी के लिए बड़ा मुश्किल टास्क है।

एनडीए में शामिल चिराग़ पासवान ने 2020 में अलग से चुनाव लड़ा था , जिसका भारी नुक़सान जनता दल यूनाइटेड को हुआ था, सीटों के रूप में।इस दफे चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पासवान, एनडीए का पार्ट है। इसलिए जनता दल यूनाइटेड के एनडीए खेमे में सबसे ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद है।

बिहार में जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी लम्बे समय से सत्ता में काबिज है। साथ में नरेंद्र मोदी भाजपा एनडीए नई दिल्ली में भी सत्ता पर काबिज है।

भाजपा को एंटीइनकमबेंसी का सामना करना है। इसे जनरली भारी मात्रा में टिकट काट कर, नया उम्मीदवार देकर दूर किया जाता रहा है। एक और तरीका है, एक नया फ्रेश दल खड़ा किया जाये जो सरकार विरोधी मतों को अपनी और खींचें, अपने प्रमुख विरोधी तक ना जाने दें। यह काम भाजपा के लिए प्रशांत किशोर कर रहे हैं।और वो इसे एक ऐजेंसी की तरह ही कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि की वो खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। और वो जेडीयू भाजपा सरकार के कुरूप चेहरे, सम्राट चौधरी पर हमलावर हैं।

बिहार में आरजेडी की घोषणाएं, ताज़ा है, संभव है, करने योग्य है, समर्थन योग्य है।यह चुनाव ऐसा है, इसमें जनता को नीतीश कुमार को हरवाकर दुख नहीं होगा, कारण नीतीश को बहुत मौका मिल चुका है।

जनता को अब नया चाहिए, जिसे डेढ़-दो दशक तक देख सकें, साथ चल सकें।

इसके लिए चिराग पासवान, तेज प्रताप यादव, प्रशांत किशोर,और तेजस्वी यादव यादव फेस मौजूद हैं।

चिराग पासवान, तेज प्रताप को आरजेडी, भाजपा, या जनता दल यूनाइटेड के पीछे रह कर चलना होगा, अपने हिसाब से सरकार नहीं चला पाएंगे, इसलिए जनता इन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देख रही है।

प्रशांत किशोर नये हैं, और खुद चुनाव नही लड़ रहे हैं, इसलिए रिजेक्ट है।

भाजपा ने फेस क्रिएट नहीं किया, नीतीश कुमार उनका फेस है। इसलिए भाजपा की दावेदारी कमजोर है ।

आरजेडी के लिए, आरजेडी की घोषणाएं, और तेजस्वी का भरोसा दोनों हैं। इसलिए आरजेडी सबसे बड़ा दल बन कर आयेगा। परिणाम बाद भाजपा के अलावा कोई भी दल तेजस्वी यादव के साथ आने में झिझक नहीं करेगा।

भाजपा के लिए बिहार, नई दिल्ली सरकार बनाये रखने के लिए बड़ा महत्वपूर्ण है।

नीतीश कुमार की स्थिति, जिंदा हाथी लाख का, मरा हाथी सवा लाख का जैसी है।


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