विचार / लेख

सौ के हुए ‘सरदार’
24-Oct-2025 8:06 PM
सौ के हुए ‘सरदार’

-अपूर्व गर्ग

उनका चेहरा एक बोलती हुई तस्वीर है। एक सुंदर तस्वीर जो आज भी उतनी ही आकर्षक है जितनी दशकों पहले रही हो। उनकी आँखों में चमक है, आत्मविश्वास है, संतोष है और कहानियाँ हैं, इतिहास है।

उन गौरव कथाओं को जानना चाहिए और आँखों में बसे इतिहास के पन्नों को पलटना चाहिए। जितने पन्ने हम पलटेंगे

उतनी संघर्ष कथाएं सामने आएँगी, आंदोलनों का स्वर्णिम इतिहास निकलकर सामने आएगा कि कैसे एक बेहद विनम्र पर अटल-अविचल, सीधे-सादे सादगी से भरपूर पर उतने ही जोश और ऊर्जा से भरे प्यारे पर मुद्दों पर तीखे तेवर रखने वाले सज्जन ने शहर के मजदूर, किसान और कर्मचारियों का शानदार नेतृत्व कर एक सरदार के तौर पर धारदार आंदोलन किये।

गरीब आदमी और उनके हक़ की लड़ाई के बीच सेतु बने ये सरदार हमारे सरदारी लाल गुप्ता जी हैं जिन्होंने दस दशक यानी सौ बरस पूरे किये। हम सब की खुशनसीबी है कि दशकों तक जनता की आवाज बने सरदारी लालजी सौ बरस से आगे का सफर इसी तरह तय करेंगे और उनकी उपस्थिति शहर के लिए हमेशा प्रेरणादायी रहेगी।

हम इन्हें देखेंगे और याद करेंगे कैसे सरदारीलाल जी की उपस्थिति आन्दोलनों के लिए रीढ़ की तरह होती और आंदोलनकारी झुकते नहीं।

बरसों पहले किसानों की पानी की मांग के आंदोलन को लेकर प्रशासन उग्रता से टूट पड़ा था पर तब सबसे आगे ये सरदार थे जिन्होंने दृढ़ता से सीना तान कर मुकाबला किया और परिणाम किसानों के लिए नहर से पानी छोड़ा गया था।

अखबार कर्मचारियों की आवाज़ बने थे सरदारीलाल जी और अखबार में हड़ताल हो जाने का इतिहास दजऱ् हो गया था पर बाद में उन वर्कर्स की अधिकाँश मांगें पूरी हुई थीं ।

एक सरकारी कारपोरेशन में ठेकेदार महिला कर्मचारियों को धमकाता था, गुंडागर्दी करता पर सरदारी लाल जी ने उन पीडि़त महिला वर्कर्स की आवाज बनकर जोरदार लड़ाई लड़ी, प्रशासन से टकराये जेल गए पर उन महिलाओं को वेतन संबंधी उनके अधिकार दिलवाये। वैसे आंदोलनों के चलते सरदारीलाल जी के लिए जेल जाना कोई नयी बात न थी, इमरजेंसी के दौरान करीब उन्नीस महीने जेल में गुजारे और कोई समझौता नहीं किया।

बिलासपुर नगर निगम के कर्मियों के सफाई कर्मचारियों के बीच रहकर उनके साथ भोजन कर वे उनके लिए लड़े ।सिर्फ संगठनों के लिए ही नहीं उनसे जुड़े एक-एक व्यक्ति की पीड़ा को अपनी पीड़ा, अपना मुद्दा बनाकर वो लड़ते।

यही वजह है तत्कालीन मध्यप्रदेश में जब एक बिजली कर्मचारी की नौकरी जाती है तो सरदारी लाल जी जबलपुर जाकर उसका बचाव करते हैं और उसकी नौकरी बचाने के बाद ही लौटते हैं।

ये सरदारीलाल जी के संघर्षों की बस झलकियां हैं उनके संघर्षों, आंदोलनों का इतिहास कितना व्यापक ,विस्तृत , धारदार होगा, उन पन्नों को पलटेंगे तो हमें वो स्वर्णिम इतिहास मिलेगा।

शहर व्यक्तियों से बनते हैं, व्यक्ति व्यक्तित्व से और व्यक्तित्व जुझारूपन -संघर्षों से । और हमारा शहर भी बना है सरदारीलाल जी जैसे लोगों के ‘कंक्रीट’ से। ये इस शहर की नींव हैं, निर्माता हैं और आंदोलनों के सरदार रहेंगे हमेशा-हमेशा के लिए।

सरदारी लाल गुप्ता जी हमेशा-हमेशा शहर और आंदोलनों को मजबूत करने के लिए प्रेरणा देते रहें और इसी तरह हमेशा हमारे साथ रहें, मैं उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए प्रणाम करता हूँ।


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