विचार / लेख
-आर.के.जैन
दिग्गज एक्टर असरानी का सोमवार, 20 अक्टूबर को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इससे पूरी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। पांच दशक से भी लंबे कॅरियर में असरानी ने कॉमेडी भरे किरदार किए, पर हर किरदार में इतनी गहराई और वैरायटी थी कि हर कोई उनका मुरीद हो गया।
पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से ट्रेनिंग के बाद उन्होंने 400 से अधिक फिल्मों में काम किया। हालांकि, कॅरियर में बहुत स्ट्रगल करना पड़ा था। दो साल तक तो असरानी काम की तलाश में भटकते रहे, पर कोई भी काम नहीं दे रहा था। तब असरानी की इंदिरा गांधी ने मदद की थी।
असरानी ने खुद एक इंटरव्यू में पूरा वाकया बताया था। असरानी के मुताबिक, एफटीआईआई की डिग्री होने के बावजूद उन्हें दो साल तक काम की तलाश में भटकना पड़ा था, पर कोई भी मदद को राजी नहीं हुआ।
बाद में असरानी को पता चला कि बॉलीवुड में एफटीआईआई के सर्टिफिकेट का कोई खास महत्व नहीं है, इसलिए वह गुजारे के लिए इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर बन गए और छात्रों को पढ़ाने लगे।
असरानी ने बताया कि जब वह एफटीआईआई का सर्टिफिकेट लेकर काम की तलाश में जाते थे, तो उन्हें यह कहकर भगा दिया जाता था कि तुम्हें लगता है कि एक्टिंग के लिए सर्टिफिकेट चाहिए? बड़े सितारों को यहां ट्रेनिंग नहीं मिलती, और तुम्हें लगता है कि तुम खास हो? दफा हो जाओ।
असरानी ने बताया था कि वह दो साल तक इसी तरह काम पाने के लिए स्ट्रगल करते रहे और फिर इंदिरा गांधी से शिकायत की। तब इंदिरा गांधी ने उनकी मदद की और प्रोड्यूसरों से बात की थी।
असरानी बोले थे, ‘दो साल तक मैं काम ढूंढने के लिए स्ट्रगल करता रहा। एक दिन इंदिरा गांधी पुणे आईं। उस समय वह सूचना एवं प्रसारण मंत्री थीं। हमने उनसे शिकायत की। हमने उन्हें बताया कि सर्टिफिकेट होने के बावजूद कोई हमें काम नहीं देता।’
उन्होंने आगे बताया था, ‘फिर वह मुंबई आईं और प्रोड्यूसरों से कहा कि उन्हें हमें काम देना चाहिए। इसके बाद काम मिलना शुरू हो गया। जया भादुड़ी को ‘गुड्डी’ में कास्ट किया गया और मुझे भी। जब ‘गुड्डी’ हिट हुई तो लोगों ने एफटीआईआई को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।’
20 अक्टूबर को असरानी का 84 साल की उम्र में निधन
‘गुड्डी’ के बाद असरानी के दिन फिर गए। उनके पास फिल्मों की बाढ़ आ गई। फिल्ममेकर्स भी असरानी के टैलेंट पर फिदा हो गए और उन्हें काम देने लगे। 70 और 80 के दशक में असरानी ने कई हिट फिल्में दीं और अपनी अलग जगह बनाई। अब 20 अक्टूबर को दिवाली वाले दिन असरानी का निधन हो गया।


