सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,2 फरवरी। वरिष्ठ सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता / ओबीसी प्रतिनिधि लक्ष्मी गुप्ता ने बजट को लेकर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत बजट 2026 को लेकर आम जनता, मध्यम वर्ग, किसान, युवा, छोटे व्यापारी तथा विशेष रूप से ओबीसी, एससी,एसटी और अल्पसंख्यक वर्गों में गहरी निराशा है। यह बजट बड़े-बड़े सपनों और घोषणाओं से भरा हुआ है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि इसमें सामाजिक न्याय, रोजग़ार और महंगाई से राहत का स्पष्ट अभाव है।
बढ़ती महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास खर्च के बावजूद इनकम टैक्स स्लैब में कोई ठोस राहत नहीं दी गई। इससे साफ है कि सरकार ने नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग की वास्तविक परेशानियों को नजऱअंदाज़ किया है। जब जेब में पैसा नहीं बचेगा तो बाज़ार कैसे चलेगा और अर्थव्यवस्था कैसे आगे बढ़ेगी?
किसानों को न तो एमएसपी की कानूनी गारंटी मिली और न ही कजऱ् से राहत। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसान की आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस और भरोसेमंद उपाय इस बजट में नहीं दिखता। छोटे व्यापारी और एमएसएमई दबाव में छोटे व्यापारियों और एमएसएमई के लिए कजऱ् की प्रक्रिया अब भी जटिल है। जीएसटी को सरल करने या ब्याज दरों में ठोस राहत देने की दिशा में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया। इससे स्थानीय व्यापार और रोजग़ार दोनों प्रभावित होंगे।महंगाई पर नियंत्रण नहींपेट्रोल, डीज़ल, गैस और रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों पर कोई ठोस राहत नहीं दी गई। इसका सीधा असर गरीब और निम्न मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।
बजट के तुरंत बाद शेयर बाजार में गिरावट यह संकेत देती है कि निवेशकों को भी इस बजट से भरोसा नहीं मिला। जब निजी निवेश धीमा होगा, तो नए उद्योग और रोजगार कैसे आएंगे? कुल मिलाकर निष्कर्षयह बजट कॉरपोरेट केंद्रित दिखाई देता है, जबकिआम आदमी, किसान, युवा और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग हाशिए पर हैं।
सरकार को चाहिए था कि वह विकास के साथ-साथ सामाजिक संतुलन और न्याय को प्राथमिकता देती, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बजट उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता। हम सरकार से मांग करते हैं -ओबीसी, एससी,एसटी के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए जाएँ,युवाओं को ठोस रोजगार योजना दी जाए,किसानों को एम एस पी की कानूनी गारंटी मिले,मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों को वास्तविक आर्थिक राहत दी जाए।


