सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 29 मई। राजीव गांधी पीजी कॉलेज एक बार फिर गंभीर अनियमितता के घेरे में है। मामला द्वितीय सेमेस्टर में बैक प्राप्त कुछ विद्यार्थियों को सीधे पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से जुड़ा है।
उच्च शिक्षा के नियमों के अनुसार, किसी भी विद्यार्थी को अगले उच्च सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने की पात्रता तभी मिलती है, जब वह उससे निचले सेमेस्टर की सभी परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो चुका हो या उसकी बैक परीक्षा क्लियर हो गई हो। यह नियम विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रगति को सुनिश्चित करने और उन्हें उच्च स्तर की पढ़ाई के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
हालांकि, राजीव गांधी पीजी कॉलेज प्रबंधन ने इस बुनियादी नियम को अनदेखा करते हुए कुछ ऐसे विद्यार्थियों को पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा का फॉर्म भरने और यहां तक कि परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी, जिनके द्वितीय सेमेस्टर में बैकलॉग था।
यह चौंकाने वाली घटना तब सामने आई, जब इस बारे में आजाद सेवा संघ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा को जानकारी मिली। विद्यार्थियों से प्राप्त सूचना और संबंधित प्रमाणों के आधार पर, श्री मिश्रा ने तत्काल इस गंभीर मुद्दे को महाविद्यालय की प्राचार्य के समक्ष उठाया।
उन्होंने प्राचार्य को उन विद्यार्थियों के बारे में विस्तार से बताया, जिनके द्वितीय सेमेस्टर में बैक होने के बावजूद उन्हें पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने दिया गया। श्री मिश्रा ने इस संबंध में ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत किए।
इस अनियमितता पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए, आजाद सेवा संघ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा ने महाविद्यालय प्रबंधन के इस कृत्य को विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने तत्काल मांग की है कि ऐसे सभी विद्यार्थियों के पांचवें सेमेस्टर के परिणामों को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित किया जाए।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी मांग की है कि महाविद्यालय के उस प्रशासनिक विभाग के कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, जिनकी लापरवाही के कारण यह चूक हुई है, और उन पर तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए।
श्री मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि महाविद्यालय प्रबंधन इस मामले में त्वरित और संतोषजनक कार्रवाई नहीं करता है, तो आजाद सेवा संघ छात्रों के हित में एक व्यापक और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।


