सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 11 अप्रैल। प्रमाणिक पाठशाला अंबिकापुर एवं ज्ञानशाला के संयुक्त तत्वावधान में भगवान महावीर जन्मकल्याणक के अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में श्वेतांबर और दिगंबर जैन समाज की सहभागिता एवं समन्वय ने समाज में एकता और सद्भावना का प्रेरणादायक संदेश दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमारी अंबिकापुर की संचालिका विद्या दीदी रहीं। उनका स्वागत जैन समाज की ममोल कोचेटा, रेखा जैन एवं अनुराधा जैन ने शाल व श्रीफल भेंट कर किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति में पाठशाला के विद्यार्थियों ने भगवान महावीर के पंच महाव्रत — सत्य, अहिंसा, अचौर्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य — पर आधारित सशक्त नाट्य मंचन किया। साथ ही बच्चों ने भजनों, गीतिकाओं, नारों एवं नृत्य के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन, उपदेश और उनके आदर्शों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों और आयु समूहों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्वेतांबर एवं दिगंबर दोनों समाजों के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने समाज में समरसता, सहयोग और सौहार्द की भावना को और भी दृढ़ किया।
कार्यक्रम का संचालन पूर्वी जैन, अक्षिता जैन, कनिष्का जैन एवं प्रियंका महनोत द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी सुंदर वाणी और संयोजन से कार्यक्रम को प्रभावशाली एवं अनुशासित बनाए रखा।
इस अवसर पर पाठशाला की शिक्षिकाएँ रूबी जैन, काकुल जैन, रुचि जैन, संगीता जैन, स्वीटी जैन एवं अंकिता जैन की गरिमामयी उपस्थिति भी रही, जिन्होंने बच्चों को इस कार्यक्रम के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि विद्या दीदी ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि धर्म केवल मानने की नहीं, जीने की प्रक्रिया है। भगवान महावीर के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हजारों वर्ष पहले थे। यदि हम सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह को जीवन में उतारें, तो एक शांतिपूर्ण और श्रेष्ठ समाज का निर्माण संभव है।कार्यक्रम के अंत में श्रीमती रीनू जैन ने सभी उपस्थितजनों, अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का हृदय से आभार व्यक्त किया।यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट उदाहरण बना, बल्कि जैन समाज की एकजुटता, बच्चों की प्रतिभा और परंपरा से जुड़ाव का प्रेरक प्रतीक भी सिद्ध हुआ।


