सरगुजा

लक्ष्य को निश्चित करें और डिग्री होल्डर न बनकर प्रतिभावान विद्यार्थी बनें-डॉ. श्रीवास्तव
21-Feb-2023 9:19 PM
लक्ष्य को निश्चित करें और डिग्री होल्डर न बनकर प्रतिभावान विद्यार्थी बनें-डॉ. श्रीवास्तव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 21 फरवरी।
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा के आइक्यूएसी, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित किया गया। 

 सरगुजा जिले के रोजगार अधिकारी एसपी त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट की जानकारी देते हुए बताया कि शासन की नीतियों के आधार पर सरकारी नौकरियां अब कम हो रही है, इसलिए प्राइवेट कंपनियों में रोजगार के लिए हम लोग प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने टाटा कंसलटिंग जैसी कंपनियों के माध्यम से रोजगार के अवसर के विषय में बताया। 

विश्वविद्यालय के कार्य परिषद के सदस्य एवं प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि छात्रों में रोजगार की असफलताओं को दूर करना हमारा उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि अपने लक्ष्य को विद्यार्थी निश्चित करें और डिग्री होल्डर न बनकर प्रतिभावान विद्यार्थी बने। 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं पर्सनालिटी स्किल डेवलपमेंट के विशेषज्ञ नागपुर से आए हुए डॉ. नीलेश गुप्ता ने कहा कि रोजगार लेने के लिए चार बातों को बहुत ध्यान देना चाहिए। माइंड सेटअप, इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट और इंप्रूवमेंट। उन्होंने कहा कि हमें रोजगार प्राप्त करने के लिए रोजगार संबंधी श्रेणियों को अच्छी तरह से जानना चाहिए जिसमें गोल, स्किल्स, नॉलेज, मेंटरिंग, प्रैक्टिस, अपॉर्चुनिटी और ट्रेनिंग शामिल है। उन्होंने बताया कि रिज्यूम बनाने के लिए स्किल और नॉलेज स्किल दोनों को प्रमुखता देनी चाहिए ।

 इस कार्यशाला में उन्होंने रोजगार के अनेक वेबसाइट की ओर भी अध्यापक छात्रों को संकेतित किया। एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अशोक सिंह ने नागपुर से आए हुए डॉ नीलेश गुप्ता को विश्वविद्यालय से एमओयू करने पर आभार व्यक्त किया। 

कुलपति जी ने एमओयू के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा इसके द्वारा ट्रेनिंग और प्लेसमेंट के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। 

उन्होंने कहा कि इस प्लेटफार्म के द्वारा विद्यार्थियों को पढऩे के बाद गाइडेंस की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को पहले योग्य बनना चाहिए क्योंकि प्यासा कुएं के पास जाता है न कि कुंआ, प्यासा के पास जाता है। 

उन्होंने यह भी कहा कि सपना देखना जरूरी है उससे अधिक जरूरी सपने का पीछा करना। उन्होंने सफलता के लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासन और समर्पण को जरूरी बताया।


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