सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 15 नवंबर। मंगलवार को आरक्षण में कटौती के विरोध में सर्व आदिवासी समाज सडक़ पर उतर आया है। जनजाति गौरव दिवस के दिन सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले सरगुजा संभाग के अलग-अलग जिलों के आदिवासियों ने अंबिकापुर के गांधी चौक को जाम कर दिया। गांधी चौक के चारों ओर की सडक़ पर बैठ कर धरना दिया व राज्य सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की।
सर्व आदिवासी समाज ने पूर्व के समान 32 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल को शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए तैनात किया गया था।
आरक्षण में कटौती के विरोध में सर्व आदिवासी समाज द्वारा मंगलवार को प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों में सडक़ जाम करने की घोषणा की गई थी। घोषणा के परिपालन में सुबह से ही सरगुजा संभाग के अलग-अलग जिलों से आदिवासी समाज के लोग अंबिकापुर पहुंचना शुरू हो गए थे। दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, इसलिए दूसरे जिलों से पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों की वाहन धरना स्थल गांधी चौक से पहले ही रुक गए थे। वहां से पैदल ही सभी रैली की शक्ल में गांधी चौक पहुंचे। दोपहर एक बजे से गांधी चौक पर सडक़ जाम आरंभ किया गया। गांधी चौक से होकर गुजरने वाले सभी चार मार्गों पर आदिवासी समाज के लोग धरने पर बैठ गए थे जिससे कई मार्गो पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी।
जाम में वाहनें तो नहीं फंसी लेकिन शहरवासियों का गांधी चौक से आना-जाना भी बंद हो गया था । गांधी चौक से होकर गुजरने वाली सभी चार मार्गों में पहले ही बैरिकेड लगाकर आवाजाही रोक दी गई। सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि राज्य की भूपेश सरकार ने आदिवासियों के हितों की अनदेखी की है। हाईकोर्ट में तथ्यों को सही तरीके से रखा नहीं गया है। भाजपा पर भी इस मुद्दे को लेकर राजनीति करने का आरोप धरने में सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों द्वारा लगाया गया।
सरकार ने मांग नहीं सुनी तो जनजाति समाज से जुड़े विधायकों पर इस्तीफे के लिए दबाब बनाने की घोषणा
जनजाति गौरव दिवस के दिन सर्व आदिवासी समाज नेछत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आरक्षण अधिनियम 2022 पारित किए जाने की मांग की है। सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के हितों की अनदेखी की है।
सर्व आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में अवगत कराया है कि राज्य सरकार उक्त मांगों को लेकर शीघ्र विधिक पहल करें, अन्यथा समाज द्वारा अनुसूचित जनजाति के विधायकों से सामूहिक त्यागपत्र मांगने हेतु उनके निवास और कार्यालय में अनिश्चितकालीन पड़ाव डाला जाएगा। इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधायकों की होगी।


