सरगुजा
कहा- पूरे प्रदेश में 15 को होगी आर्थिक नाकेबंदी, विस सत्र भी घेरेंगे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 5 नवंबर। पूर्व केंद्रीय मंत्री व सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक अरविंद नेताम ने आरक्षण व पेशा कानून के मुद्दे पर शनिवार को नगर के विश्राम भवन में प्रेसवार्ता के दौरान आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासियों के आरक्षण को लेकर न तो भाजपा और न ही कांग्रेस सरकार ने ईमानदारी बरती। अब आदिवासी समाज का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। आगामी 15 नवंबर को पूरे प्रदेश में आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी श्री नेताम ने दी। यह भी कहा कि समाज के द्वारा बड़ी संख्या में विधानसभा सत्र का भी घेराव किया जाएगा। इस दौरान अप्रिय स्थिति निर्मित होने की भी संभावना उन्होंने जताई।
श्री नेताम ने कहा कि पिछला सितंबर माह छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के लिए सबसे मनहूस महीना माना जा रहा है। इस महीने में दो ऐसी प्रमुख घटनाएं हुई जो आजादी के 75 साल में कभी नहीं हुई। पेशा कानून नियम में जल जंगल जमीन का जो अधिकार था और जो ताकत थी, उसे राज्य सरकार ने जानबूझकर कमजोर कर दिया है, दूसरी घटना छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला आरक्षण को लेकर हुआ।
श्री नेताम ने कहा कि नय राज्य बनने के बाद वर्ष 2005 में भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिफिकेशन भेजा था, जिसमें आंकड़ों के हिसाब से आदिवासी दलित एवं पिछड़ा वर्ग का कितने प्रतिशत आरक्षण होगा, इसकी जानकारी मांगी थी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने वर्ष 2011 तक उसे जस के तस रखा। इसके लिए आदिवासी समाज के द्वारा आंदोलन भी किया गया। वर्ष 2012 में शासन ने नोटिफिकेशन करके भारत सरकार के जो निर्देश थे, उसे लागू किया। इस नोटिफिकेशन के बाद उसके खिलाफ में दलित समाज, पिछड़ा वर्ग व सामान्य वर्ग के काफी लोगों ने रिट याचिका दायर किया। उक्त नोटिफिकेशन के बाद 6 साल भाजपा की सरकार पावर में रही। वर्तमान में लगभग 4 साल से कांग्रेस की सरकार है। दोनों सरकार ने जो आदिवासियों से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करने थे और जो कागजात प्रस्तुत करना था, वह प्रस्तुत नहीं कर पाए।
श्री नेताम ने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकार ने आदिवासियों के इस गंभीर मुद्दे पर ईमानदारी नहीं दिखाई जिसे कारण हाई कोर्ट में जो फैसला सामने आया। श्री नेताम ने यह भी कहा कि आज आदिवासी समाज के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है की उनका जल जंगल जमीन से अधिकार चला गया रोजगार पर आरक्षण खत्म हो गया प्रदेश की 32 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है उनके पास अब कुछ नहीं बचा है।
श्री नेताम ने अफसोस जताते हुए कहा कि दो-दो बड़ी घटनाओं के बाद भी एक भी टिप्पणी किसी विधायक मंत्री के द्वारा नहीं किया जाना विडंबना है समाज इस पर चिंतन कर रहा है आने वाले चुनाव में समाज की तरफ से कोई भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।


