सरगुजा

शंकर घाट में महामाया छठ सेवा समिति एवं अनोखी सोच संस्था ने श्रमदान करते कई ट्रैक्टर कचरा बाहर निकाला
09-Oct-2022 8:16 PM
शंकर घाट में महामाया छठ सेवा समिति एवं अनोखी सोच संस्था ने श्रमदान करते कई ट्रैक्टर कचरा बाहर निकाला

5 दिनों का काम 4 घंटे में ही खत्म कर दिया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 9 अक्टूबर।
नदी सिर्फ नदी नहीं, एक संस्कृति है और इस संस्कृति को खतरा उसमें कचरा फेंकने वालों से हमेशा रहता है। शहर के विभिन्न नदी तालाबों में हो भी यही रहा है। हर वर्ष छठ महापर्व से पहले शंकर घाट स्थित छठ घाट (बांक नदी) की साफ सफाई महामाया छठ सेवा समिति के द्वारा की जाती है।

इस बार नगर की अनोखी सोच संस्था ने भी इस पुनीत कार्य के लिए अपने हाथ बढ़ाए। फिर क्या था, हाथ से हाथ मिले और जो काम 5 दिनों में होना था वह महज 4 घंटे में समर्पित सेवा भाव के कारण हो गया। 4 घंटे नदी व उसके आसपास के क्षेत्र में श्रमदान करते हुए कई ट्रैक्टर कचरा बाहर निकाला गया।

संस्था के सभी सदस्यों ने जिस तरीके से मेहनत की वह उनके समर्पित सेवा भाव को बताती है। कई जगह देखा जाता है कि अक्सर लोग श्रमदान का कार्य सिर्फ फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रखते हैं, परंतु रविवार को शंकर घाटी स्थित छठ घाट में श्रमदान का एक अलग ही रूप देखने को मिला। श्रमदान में लगे जितने भी लोग थे उनका ध्यान सिर्फ और सिर्फ वहां की गंदगी को समाप्त कर उसे साफ सुथरा करने में लगा हुआ था।

सुबह 10 बजे से श्रमदान का काम शुरू हुआ, जो दोपहर 2 बजे तक अनवरत चलता ही रहा। इस श्रमदान के बाद शंकर घाट छठ घाट की स्थिति पहले से बिल्कुल ही अलग नजर आने लगी। जिस तरह से नदी के अंदर और उसे किनारे कचरे का अंबार था, उसे महामाया सेवा समिति व अनोखी सोच के कार्यकर्ता एवं पदाधिकारियों ने मेहनत कर साफ कर डाला। इस दौरान महामाया छठ सेवा समिति के अध्यक्ष विजय सोनी, अनोखी सोच संस्था के अध्यक्ष सूर्यप्रकाश साहू, अभय साहू, पंकज चौधरी, सहित भारी संख्या में महामाया सेवा समिति व अनोखी सोच संस्था के सदस्य मौजूद थे।

फोटो फ्रेंम सहित लोगों ने नदी के किनारे रख दी थी भगवान की तस्वीरें
शंकर घाट स्थित छठ घाट में दुर्गा पूजा एवं गणेश विसर्जन के भारी मात्रा में अवशेष तो थे ही, इसके साथ साथ लोगों के द्वारा भगवान की तस्वीरें पूरे फ्रेंम के साथ न सिर्फ नदी के किनारे यत्र तत्र रखी गई थी, बल्कि कई लोगों ने तो उसे नदी में ही प्रवाहित कर दिया था। कांच के फ्रेम से नदी के अंदर छठ पूजा के दौरान लोगों को चोट न पहुंचे, इसके लिए श्रमदान में लगे लोगों के द्वारा एक-एक तस्वीर को नदी के बाहर निकाला गया। कांच को अलग कर पूरे सम्मान के साथ भगवान की तस्वीर को प्रवाहित किया गया।


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