राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा कार्यकारिणी इस तरह समझें..
30-Sep-2020 5:19 PM 10
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ :  भाजपा कार्यकारिणी इस तरह समझें..

भाजपा कार्यकारिणी इस तरह समझें..

प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी में नए-पुराने चेहरों का समावेश  है। ज्यादातर नाम पहले से ही तय थे। हाईकमान के कुछ निर्देशों के बाद कई नाम बदले भी गए। मसलन, यह कहा गया कि युवा मोर्चा में 35 साल से अधिक उम्र के लोग नहीं रहेंगे। इस वजह से पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी युवा मोर्चा अध्यक्ष बनने से रह गए। इससे पहले 50 बरस के नेता भी युवा मोर्चा अध्यक्ष रहते आए हैं। निवर्तमान अध्यक्ष विजय शर्मा तो 50 पार कर चुके हैं। हमने इसी कालम में 27 सितंबर को अमित साहू के भाजयुमो अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना जताई थी। तब भाजपा के ज्यादातर लोगों के लिए अमित अपरिचित चेहरा थे।

अमित को अध्यक्ष बनवाने में पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह की भूमिका रही है, यद्यपि वे बृजमोहन अग्रवाल के समर्थक रहे हैं। विधानसभा चुनाव के समय बृजमोहन के एक-दो वार्ड में उन्हें जिम्मेदारी दी जाती रही है। अब वे एकाएक प्रदेश के नेता हो गए। चौधरी को महामंत्री बनाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन उन्हें सिर्फ मंत्री बनाकर संतोष किया गया। एक बार फिर नलिनेश ठोकने को मीडिया विभाग की कमान सौंपी गई है। नलिनेश, सौदान सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं।

सच्चिदानंद उपासने तो खुले तौर पर नलिनेश की आलोचना करते रहे हैं। उनकी शिकायत रही कि प्रवक्ता होने के बावजूद नलिनेश उनकी विज्ञप्ति नहीं जारी करते हैं। श्रीचंद सुंदरानी के खिलाफ भी उपासने ने काफी कुछ कहा था। अब हाल यह है कि उपासने को ही उपाध्यक्ष और प्रवक्ता पद से बेदखल कर दिया गया। वे मात्र विशेष आमंत्रित सदस्य रह गए हैं। नलिनेश की धमक ऐसी है कि दुग्ध महासंघ के पूर्व चेयरमैन और मीडिया विभाग के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे रसिक परमार का नाम सूची में नहीं है। पूरी सूची में सौदान सिंह और रमन सिंह की छाया देखी जा रही है।

 समधियों के बीच..

यह भी संयोग है कि भाजपा और कांग्रेस का कोष संभालने वाले आपस में नजदीकी रिश्तेदार हैं। भाजपा ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल को कोषाध्यक्ष बनाया है। वैसे गौरीशंकर इस पद पर नहीं थे तब भी वे कोष का हिसाब किताब अप्रत्यक्ष रूप से उनके पास ही था। पार्टी में कोष नंदन जैन संभालते हैं। वे गौरीशंकर के अत्यंत भरोसेमंद हैं, पहली बार उन्हें सहकोषाध्यक्ष का पद दिया गया है। गौरीशंकर के समधी रामगोपाल अग्रवाल कांग्रेस का कोष संभालते हैं। रामगोपाल पिछले कई साल से यह काम देख रहे हैं। रामगोपाल की उपयोगिता का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें नागरिक आपूर्ति निगम का चेयरमैन बनाए जाने के बाद भी कोषाध्यक्ष पद से नहीं हटाया गया। दोनों ही समधी अपने विशिष्ट गुणों के कारण अपनी पार्टी में उपयोगी बने हुए हैं।

गजब का तालमेल

सुभाष राव को एक बार फिर प्रदेश कार्यालय प्रभारी बनाया गया है। सुभाष राव पिछले तीन दशक से कार्यालय का प्रभार देख रहे हैं। राज्य नहीं बना था, तब जिले का प्रभार देखते थे। कुछ दिनों के लिए उन्हें कार्यालय प्रभारी पद से हटाया गया था। तेज तर्रार नेता वीरेन्द्र पाण्डेय जब प्रदेश भाजपा के महामंत्री थे, तब उन्होंने सुभाष राव की जगह प्रदीप सराफ को कार्यालय प्रभारी बनाया था। थोड़े दिन बाद प्रदीप सराफ को हटा दिया गया। दिवंगत संगठन मंत्री गोविंद सारंग के करीबी रहे बालमुकुंद शर्मा याद करते हैं कि सारंगजी ने सुभाष राव की कार्यक्षमता को देखते हुए जगदलपुर से रायपुर बुलाया था और कार्यालय की जिम्मेदारी दी थी। उस समय जेब खर्च के लिए चार-पांच हजार रूपए ही मिलते थे। सुभाष राव मेहनती और ईमानदार व संगठन के प्रति निष्ठावान रहे। यही वजह है कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद लगातार 10 साल हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन रहे।

सुभाष राव के साथ छगन मूंदड़ा को सहप्रभारी बनाया गया है। दोनों के बीच अच्छी ट्यूनिंग है। पार्टी के भीतर गौरीशंकर अग्रवाल, राजेश मूणत, लता उसेंडी, सुभाष राव और छगनलाल मूंदड़ा व राजीव अग्रवाल के बीच गजब का तालमेल है। इन सभी को एक ही परिवार का सदस्य माना जाता है। साल-दो साल में ये सभी नेता एक साथ सैर सपाटे के लिए प्रदेश से बाहर भी जाते हैं। खास बात यह है कि ये सभी सौदान सिंह और रमन सिंह के अत्यंत भरोसेमंद हैं।

रोजमर्रा के कामों में आसानी

खबर है कि प्रवक्ता बनने से वंचित नेता अब मीडिया पैनलिस्ट बनने  की कोशिश में जुट गए हैं। मीडिया पैनलिस्ट को टीवी डिबेट में  पार्टी का पक्ष रखने के लिए भेजा जाता है। टीवी पर चेहरा दिखने से आम लोगों के बीच चर्चा होते रहती है। इतना ही राजनीतिक दुकानदारी चलाने के लिए काफी है। चर्चा तो यह भी है कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को मीडिया पैनलिस्ट बनाने के लिए एक धर्मगुरू भी सिफारिश करने वाले हैं। पहले भी धर्मगुरू की सिफारिश पर उन्हें मीडिया पैनलिस्ट बनाया गया था। एक अन्य के खिलाफ तो ढेरों मामले हैं। कोरोना का इलाज करा रहे इस नेता से एम्स प्रबंधन इतना तंग आ गया था कि एम्स प्रबंधन ने थाने में रिपोर्ट कराने की धमकी दी थी। तब सांसद सुनील सोनी ने हस्तक्षेप कर मामले को सुलझाया था। ये नेता भी मीडिया पैनलिस्ट बनने की कोशिश में हैं। राजनीतिक दलों के मीडिया पैनलिस्ट होने से अफसरों के बीच नाम और चेहरे की पहचान हो जाती है, रोजमर्रा के कामों में आसानी हो जाती है।

कांग्रेस अपनों पर तय नहीं कर पा रही...

कांकेर में पत्रकारों को पीटने के वीडियो सामने आने के बाद भी प्रदेश के कांग्रेस नेता यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इससे कैसे निपटा जाए। कांग्रेस प्रवक्ता ने पहले दिन कहा कि हमलावर कांग्रेस से पहले ही निष्कासित है, और यह पत्रकारों की आपसी लड़ाई है। इसके बाद हमलावरों में से एक गफ्फार मेमन ने अपने आपको कांग्रेस पार्टी का और विधायक प्रतिनिधि बताने वाले लेटरहैड पर संसदीय सचिव और विधायक शिशुपाल सोरी को एक दिलचस्प इस्तीफा लिखकर भेजा। उसने लिखा- 26 सितंबर को आपसी विवाद से हुई घटना में कुछ लोगों के द्वारा सोशल मीडिया में अनावश्यक रूप से आपके और कांग्रेस पार्टी के साथ जोड़कर दुष्प्रचार किया जा रहा है। मैं नहीं चाहता कि उक्त घटना से आपकी प्रतिष्ठा पर आंच आए। मैं कांग्रेस का सच्चा सिपाही हूं, और हमेशा रहूंगा, और पार्टी का काम निष्ठापूर्वक करते रहूंगा। मेरे ऊपर लगे आरोप की जांच होने तक मैं विधायक प्रतिनिधि के पद से त्याग पत्र आपके समक्ष प्रस्तुत करता हूं।

अब इस इस्तीफे से जाहिर है कि जिसे कांग्रेस से निष्कासित कहा जा रहा था, वह तो कांग्रेस का सच्चा सिपाही था, है, और रहेगा, और वह विधायक प्रतिनिधि भी है। जो विधायक संसदीय सचिव भी है वह पार्टी से किसी निष्कासित को तो अपना प्रतिनिधि बनाएगा नहीं।

इसके बाद कल कांकेर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभद्रा सलाम ने इस घटना के बाद जिला कांग्रेस महामंत्री अब्दुल गफ्फार मेमन को पार्टी संगठन के पद और सदस्यता से निलंबित करते हुए जो बयान जारी किया है, उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस ने हमले की इस घटना को मान लिया है।

सुभद्रा सलाम ने लिखा है कि कांग्रेस को प्राप्त वीडियो व अन्य जानकारी के  आधार पर यह निलंबन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उक्त घटना में इस व्यक्ति द्वारा बेहद आपत्तिजनक एवं अश्लील गालियां देते हुए पत्रकार के साथ मारपीट करना दिख रहा है जो कि अत्यंत आपत्तिजनक है तथा उक्त हरकत से पार्टी की छवि धूमिल हुई है। इसलिए अब्दुल गफ्फार मेमन, महामंत्री जिला कांग्रेस कमेटी को पार्टी से निलंबित करके प्रदेश स्तरीय जांच समिति बनाई गई है। इस कमेटी में केशकाल के विधायक संतराम नेताम, जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन, गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद, रवि घोष महामंत्री प्रदेश कांग्रेस को रखा गया है, और यह दो दिन में प्रदेश कांग्रेस को रिपोर्ट देगी।

कांकेर जिला कांग्रेस कमेटी ने निर्विवाद रूप से इस हमलावर को अपना माना, निलंबित किया, (जिसके लिए अपना होना जरूरी होता है), और हमले को भी हकीकत माना, यह भी माना कि इससे पार्टी की बेइज्जती हुई है।

अब कल ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी से एक चि_ी जारी हुई जिसमें एक और जांच कमेटी बनाई गई जिसे संशोधित लिखा गया। इस कमेटी में जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन रायपुर उत्तर विधायक विकास उपाध्याय, गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद, और प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री रवि घोष को रखा गया। जिला कांग्रेस द्वारा घोषित कमेटी में से केशकाल विधायक संतराम नेताम को हटाया गया, और रायपुर के एक विधायक विकास उपाध्याय को जोड़ा गया। जिस कमेटी को दो दिन में अपनी रिपोर्ट देनी थी, उसके काम शुरू करने के पहले ही उसमें फेरबदल हो गया। दिलचस्प बात यह भी है कि प्रदेश कांग्रेस ने जिला कांग्रेस के बताए गए पार्टी पदाधिकारियों को फिर से कथित कांग्रेस कार्यकर्ता लिखा, यानी प्रदेश कांग्रेस ने हमलावरों को कांग्रेसी न मानने की शुरूआत जांच के पहले ही कर दी। दो दिनों में सामने आई इन तीन चि_ियों से कांग्रेस की और फजीहत हो रही है। इस बीच सोशल मीडिया ऐसे विज्ञापनों की तस्वीरों से पटा हुआ है जिनमें हमलावर अपने को कांग्रेस नेता बता रहे हैं।

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