सारंगढ़-बिलाईगढ़
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सारंगढ़, 7 फरवरी। कलेक्टर सभागार में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को लेकर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने जिले में चल रहे फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम और सामूहिक दवा वितरण अभियान (एमडीए) के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. एफ.आर. निराला, डिप्टी कलेक्टर शिक्षा शर्मा, तहसीलदार प्रकाश पटेल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने भी भाग लिया, जिनमें यशवंत सिंह ठाकुर, भरत अग्रवाल, रामकिशोर दुबे, ओमकार केशरवानी, गोविंद बरेठा, राजेश यादव, योगेश कुर्रे, टंडन सहित अन्य पत्रकार शामिल थे।
कलेक्टर डॉ. कन्नौजे ने बताया कि फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है, जो क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलती है। इसे सामान्य भाषा में हाथीपाँव रोग भी कहा जाता है। संक्रमित मच्छर के काटने पर यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। यह बीमारी वंशानुगत या जन्मजात नहीं होती। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया के शुरुआती लक्षणों में बुखार, खुजली और अंगों में सूजन हो सकती है। लंबे समय बाद हाथ-पैर या अंडकोष में भारी सूजन (हाइड्रोसील) जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कई बार इसके कीटाणु शरीर में 5 से 15 वर्षों तक बिना लक्षण के बने रहते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है।
कलेक्टर ने सामूहिक दवा वितरण अभियान (एमडीए) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान के तहत प्रभावित क्षेत्रों में पूरी आबादी को फाइलेरिया से बचाव के लिए मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। इसमें मुख्य रूप से डीईसी (ष्ठद्ब-द्गह्लद्ध4द्य ष्ड्डह्म्ड्ढड्डद्वड्ड5द्बठ्ठद्ग) और ्रद्यड्ढद्गठ्ठस्रड्ड5शद्यद्ग की गोलियां दी जाती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में ढ्ढ1द्गह्म्द्वद्गष्ह्लद्बठ्ठ भी दी जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दवा 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी स्वस्थ व्यक्तियों को लेनी चाहिए। हालांकि 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, अत्यधिक वृद्ध और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाती। दवा हमेशा भोजन के बाद ही लेने की सलाह दी गई।
डॉ. कन्नौजे ने बताया कि दवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने ही खिलाई जाती है ताकि सही खुराक सुनिश्चित हो सके और किसी भी तत्काल समस्या की स्थिति में सहायता दी जा सके। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति पर इस दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता, लेकिन जिनके शरीर में माइक्रो फाइलेरिया मौजूद होते हैं, उन्हें हल्का चक्कर, सिरदर्द या उल्टी जैसी सामान्य प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। यह दवा के प्रभावी होने का संकेत होता है।
जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. एफ.आर. निराला ने भी पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि किसी भी असुविधा की स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र या रैपिड रिस्पांस टीम से संपर्क किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में पत्रकारों के विभिन्न प्रश्नों का समाधान किया गया। प्रेस वार्ता में लगभग 30 पत्रकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन अल्पाहार के साथ किया गया।


