राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : दिल्ली में हाई प्रोफाइल छत्तीसगढ़
20-Mar-2026 7:27 PM
राजपथ-जनपथ : दिल्ली में हाई प्रोफाइल छत्तीसगढ़

दिल्ली में हाई प्रोफाइल छत्तीसगढ़

केंद्र सरकार ने कल प्रतिनियुक्ति पर एक अहम पोस्टिंग की। छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस डॉ. रवि मित्तल को देश चलाने वाले प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव नियुक्त किया है।  रजत जयंती वर्ष मना रहे छत्तीसगढ़ के अब तक के प्रशासनिक इतिहास में वे तीसरे  अफसर हैं जो पीएमओ में सेवा देंगे। सबसे पहले रिटायर्ड आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यम रहे। उनके साथ एक रिकार्ड यह भी रहा कि पीएमओ में लंबे समय तक रहे। बीवीआर ने दो दो प्रधानमंत्री पहले मनमोहन सिंह ,फिर नरेंद्र मोदी के साथ काम किया। वे धारा 370 हटने के बाद बने पृथक जम्मू कश्मीर के पहले मुख्य सचिव भी रहे।उनके बाद डा रोहित यादव पदस्थ रहे। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति खत्म कर यादव पीएमओ से ही छत्तीसगढ़ लौटे थे। इनके बाद अब  डा मित्तल पीएमओ जा रहे। वैसे यहां यह बताना भी उचित होगा कि इस ढाई दशक में छत्तीसगढ़ के कई वरिष्ठ आईएएस अफसरों ने केंद्र में कई अहम विभागों में काम किया। सुनील कुमार, दिवंगत  अर्जुन सिंह के साथ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय,  शिवराज सिंह पेट्रोलियम मंत्रालय एन बैजेंद्र कुमार एम्स दिल्ली और संयुक्त सचिव सूचना प्रसारण मंत्रालय, निधि छिब्बर पहले रक्षा मंत्रालय फिर सीबीएसई अध्यक्ष अब नीति आयोग में, अमित अग्रवाल सीईओ आधार प्राधिकरण में हैं।  गौरव द्विवेदी प्रसार भारती में सीईओ हैं। ऋचा शर्मा एडिशनल सेक्रेटरी, सुबोध सिंह प्रतियोगी परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के महानिदेशक पद से लौटे।

नीरज बंसोड़ गृहमंत्री अमित शाह के प्राइवेट सेक्रेटरी के पद पर हैं। निधि, अमित और ऋचा तो केंद्र में सचिव बनने की कतार में हैं। यदि आईपीएस अफसरों की ऐसी ही राष्ट्रीय हाईप्रोफाइल पोस्टिंग पर देखें तो रवि सिन्हा दो दशक तक रॉ में रहे और इस सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी के चीफ पद से रिटायर हुए। इनसे पहले हाल में दिवंगत  विश्वरंजन भी केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी में संयुक्त निदेशक रहने के बाद छत्तीसगढ़ में डीजीपी के पद पर लौटे। वहीं स्वागत दास भी केंद्रीय गृह मंत्रालय में आंतरिक सुरक्षा सचिव रहे। राज्य गठन के बाद से ही वे दिल्ली में रहे और रिटायर हुए। तो अमित कुमार भी 10 वर्ष तक सीबीआई में रहे और स्पेशल डायरेक्टर  पद से लौटे।

वहीं तीसरे अभा सेवा वाले आईएफएस कैडर में ऐसी राष्ट्रीय पोस्टिंग के अफसर एक भी नहीं है। संजय ओझा केन्द्र सरकार में रहे लेकिन डायरेक्टर तक ही पहुंच पाए।

बिना होली मिलन के निपट गया सत्र

विधानसभा के बजट सत्र के बीच पडऩे वाले होली पर्व की रौनक इस बार फीकी रही। परंपरा के अनुसार होली अवकाश से पहले विधानसभा परिसर में विधायक क्लब का रंगारंग होली मिलन समारोह आयोजित होता था, जहां सत्ता और विपक्ष के सदस्य रंग-गुलाल के साथ एक-दूसरे से मिलते थे। लेकिन इस बार ऐसा कोई आयोजन नहीं हो सका।

बताया जाता है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को स्पाइन सर्जरी के लिए कोयम्बतूर जाना पड़ा, जिसके चलते कार्यक्रम को टाल दिया गया। बाद में यह सहमति बनी कि उनके लौटने के बाद रंग पंचमी के आसपास आयोजन किया जाएगा। संस्कृति संचालनालय ने  इसके इंतजाम भी कर रखे थे। तिथियों में कई बार बदलाव हुआ और 17-18 मार्च से बढ़ाकर 19 मार्च तक विचार किया गया,लेकिन 19 मार्च को चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने के कारण अंतत: होली मिलन समारोह निरस्त कर दिया गया।

इधर, रमजान  पर राजनीतिक इफ्तार पार्टियों की भी इस बार कमी रही। आमतौर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मुस्लिम समाज के लिए इफ्तार का आयोजन करते रहे हैं, लेकिन इस बार केवल अमित जोगी ने ही इफ्तार पार्टी दी। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज भी इस बार आयोजन से दूर रहे। भाजपा शासन काल में वे ही मुख्य आयोजक होते हैं। इफ्तार के लिए आधे घंटे पहले दफ्तरों से छुट्टी के विवाद में फंसने की वजह से  आयोजन से दूर रहना मुनासिब समझा।

इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को भी एक कारण माना जा रहा है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की खबरों के चलते शिया समुदाय में शोक का माहौल बताया जा रहा है, जिसका असर स्थानीय स्तर पर भी पड़ा। हालांकि, मुस्लिम संगठन 'हुसैनी सेना’ द्वारा सुभाष स्टेडियम में एक इफ्तार पार्टी आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस और भाजपा के कई नेताओं ने शिरकत की।

सोशल मीडिया पर जुगाड़ चूल्हे की चर्चा 

देशभर में एलपीजी सिलेंडर की कमी से जहां छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ी हैं, वहीं कुछ लोगों ने हार मानने के बजाय रास्ता खुद बना लिया है। जगदलपुर के एक रेस्टोरेंट संचालक ने ऐसा ही देसी जुगाड़ तैयार किया है, जिसकी सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है।

तस्वीर में दिख रहा यह खास चूल्हा पूरी तरह स्थानीय संसाधनों से तैयार किया गया है। इसमें बीच में कोयला डालने की व्यवस्था है, जबकि नीचे बने दो अलग-अलग होल में लकड़ी के टुकड़े जलाए जाते हैं। इस डिजाइन की खासियत यह है कि एक साथ दो काम किए जा सकते हैं। एक तरफ डोसा तैयार होगा, तो दूसरी तरफ बड़ा।

गैस मिले या न मिले, लेकिन रोजी-रोटी नहीं रुकनी चाहिए। यह सोच इस इनोवेशन के पीछे झलक रही है।


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