राजपथ - जनपथ
धंधेबाज तय करते हैं!
एक तरफ तो चारों तरफ गाडिय़ाँ बढ़ रही हैं, ट्रैफिक भी बढ़ रहा है, पार्किंग की जगह बुरी तरह कम पड़ रही है। ऐसे में राजधानी रायपुर की समता कॉलोनी की मुख्य सडक़ पर दोनों तरफ लगभग हर मकान एक दुकान या रेस्टोरेंट में बदल चुका है। ट्रैफिक जाम हमेशा रहता है। लोगों को किसी दुकान के सामने अपनी गाड़ी रोकने की जगह नहीं मिलती। और ऐसे में इस सडक़ पर एक धर्मशाला भवन के बाहर आधी सडक़ को घेरते हुए एक शामियाना भी लगा दिया गया, जिसमें खाने-पीने का इंतजाम था। सारा खाना-पीना सडक़ पर!
अब किराया भंडार वाले यह तय करते हैं कि शहर में कहाँ स्वागत द्वार लगेगा, किस त्योहार पर लगेगा और बाद में आने वाले कई महीनों तक वहाँ बना रहेगा, क्योंकि कुछ और त्योहार भी बाद में आते हैं, जिनसे किराया मिलेगा। पंडाल सडक़ पर कितना बड़ा लगेगा, कैसे लगेगा, कब लगेगा, यह भी किराया भंडार वाले तय करते हैं।
बड़ी दिलचस्प बात यह है कि सरकार के कंस्ट्रक्शन ठेकेदार तय करते हैं, स्कूलों को या दूसरे सरकारी विभागों को कौन-सा सामान खरीदना है, यह सप्लायर तय करते हैं। और सार्वजनिक जगहों पर जगह घेरकर पंडाल-शामियाने लगाने का फैसला किराया भंडार वालों के पास है। सरकार और समाज कई किस्म के फैसलों के बोझ से मुक्त हैं।
विधानसभा में 20-20?
छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन में पहला बजट सत्र अंतिम सत्र की ओर है। उससे पहले तीसरे सप्ताह के आज अंतिम दिन समय से पहले सत्रावसान की चर्चा होने लगी है। कल रात अचानक हुई भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद से पक्ष और विपक्ष के खेमे में चर्चा है कि सत्र 20 मार्च के बजाय 17-18 को मानसून सत्र तक के लिए स्थगित किया जा सकता है। इसे देखते हुए विधानसभा सचिवालय भी सरकारी कामकाज निपटाने में जुट गया है। आज एकमुश्त 77 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किए जाने से भी इसकी प्रबल संभावना बढ़ गई हैं। ऐसा सत्र के अंतिम दिनों में ही होता है। सत्र 23 फरवरी से शुरू हुआ था। पहले सप्ताह अभिभाषण, बजट प्रस्तुति की कार्रवाई हुई। उसके बाद सप्ताह भर का होली अवकाश रहा। 9 मार्च से कार्यवाही 20-20 की तरह संचालित कर मंत्रियों के विभागों के बजट मांगे पारित कराईं गई। सोमवार को आधा दर्जन से अधिक विधेयक पेश कर पारित कराए जाने है। इनमें सरकार का महत्वाकांक्षी धर्मांतरण रोधी विधेयक भी शामिल हैं। अगले दिन विनियोग विधेयक पारित कर समापन किए जाने की चर्चा है। इस सत्र में पहली बार अस्वस्थता और आपरेशन की वजह स्पीकर शामिल नहीं हो सके। हालांकि उन्होंने बाहर से ही नजर रखा । इस दौरान सभापतियों धरम लाल कौशिक, धर्मजीत सिंह और प्रबोध मिंज ने बेहतर संचालन किया। श्री मिंज ने तो मतविभाजन भी हल किया। इस तरह से पिछले कई सत्रों की तरह यह बजट सत्र भी समय से पहले अवसान की ओर अग्रसर है।
सरकारी बोर्ड इश्तहार के लिए

किसी गैरजिम्मेदार समाज में किसी सरकारी नोटिस, किसी जगह का पता-ठिकाना बताने वाले बोर्ड पर भी लोग इश्तहार चिपका देते हैं। सडक़ों के बीच में डिवाइडरों के सिरे पर गाडिय़ों को सावधान करने के लिए लगाए गए रिफ्लेक्टरों को तो मानो सिनेमा के पोस्टर लगाने के लिए ही बनाया गया है। अब चूंकि यह राजधानी है, यहां राजनीतिक हलचल बहुत रहती है, स्थानीय म्युनिसिपल में भी बहुत नेता रहते हैं, इसलिए उनके राजनीतिक बैनर-पोस्टर के लिए जगह कम पड़ती है। सडक़ों पर जो बड़े-बड़े स्वागत द्वार जैसे गेट लगाए जाते हैं, वहां पर आगे की जगहों के नाम लिखे रहते हैं, ताकि दूसरे शहर से आए हुए लोग पता-ठिकाना जान सकें, उन पर भी राजनेताओं के बैनर और बोर्ड सज जाते हैं, जिन्हें पता जानना हो, वे जाएं भाड़ में। फिलहाल नेताओं पर तो किसी का बस चलता नहीं, अफसर कम से कम सरकारी बोर्ड पर लगाए जाने वाले दूसरे तरह के नोटिसों पर कार्रवाई तो कर सकते हैं?


