राजपथ - जनपथ
केन्द्रीय सूचना आयोग में स्वागत दास
केन्द्र सरकार ने केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी), और आठ सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर दी है। खास बात ये है कि आयोग के गठन के बाद पहली बार सारे पदों पर नियुक्ति हुई है। पद पाने वालों में छत्तीसगढ़ कैडर के रिटायर आईपीएस अफसर स्वागत दास भी हैं, जिन्हें सूचना आयुक्त बनाया गया है।
आईपीएस के 87 बैच के अफसर स्वागत दास लंबे समय तक आईबी में रहे। वो स्पेशल डायरेक्टर थे, और फिर केन्द्र सरकार में आंतरिक सुरक्षा के विशेष सचिव के पद से रिटायर हुए। यद्यपि उनका नाम यहां डीजीपी पद के लिए भी चर्चा में रहा। मगर अब रिटायरमेंट के बाद उन्हें केन्द्रीय सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है।
केन्द्रीय मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर राजकुमार मीणा की नियुक्ति की गई है, जो कि 90 बैच के आईपीएस अफसर हैं। अन्य सूचना आयुक्तों में सुरेन्द्र सिंह मीणा, आशुतोष चतुर्वेदी, सुधा रानी रेलंगी, पीआर रमेश, खुशवंत सिंह सेठी, जया वर्मा सिन्हा, संजीव कुमार जिंदल हैं। ये सभी अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञ माने जाते हैं।

विधानसभा की प्रतिमाएं और संयोग
कल से नई नवेली विधानसभा में कामकाज शुरू होने जा रहा है। 51-52 एकड़ के परिसर में दरो-दीवार सब कुछ नया-नया सा होगा। खर्च भी भारी भरकम हुआ है। पुराने भवन की कोई भी कामकाजी वस्तु नए भवन में रियूज़ नहीं की जा रही है। हालांकि 25 वर्ष के इतिहास को सहेज कर सम्मान का संकल्प दोहराया जा रहा है। यानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, युवा शक्ति के प्रतीक स्वामी विवेकानंद और संविधान के प्रतीक अशोक स्तंभ की प्रतिमाएं शिफ्ट होंगी ।
इनमें से ध्यान मग्न महात्मा गांधी, और अशोक स्तंभ पहली विधानसभा के समय स्थापित किए गए थे। और स्वामी विवेकानंद चौथी विधानसभा के समय। इन प्रतिमाओं के साथ एक और संयोग जुड़ा है। वह यह कि तीनों प्रतिमाएं हमारे छत्तीसगढ़ भिलाई के शिल्पकार पद्म श्री जेएम. नेल्सन ने बनाए हैं। यही एक अहम वजह भी है कि नई विधानसभा में नई प्रतिमाएं बनवाने के बजाय इन्हें ही स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह भी बता दें कि नए भवन परिसर में स्थापित छत्तीसगढ़ निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा को भी नेल्सन ने ही आदमकद आकार दिया है। अब तीनों प्रतिमाएं अटलजी के पास ही स्थापित की जाएंगी। यह कार्य शीत सत्र पूरा होने के बाद होगा।

नौकर-चाकर भी करोड़पति
पिछले दिनों आयकर की टीम ने रायपुर के एक स्टील कारोबारी के यहां छापेमारी की। कारोबारी का परिवार मूलत: हरियाणा का है, और कुछ साल पहले यहां आकर कारोबार शुरू किया था। उन्होंने रायपुर में तीन स्पंज आयरन प्लांट खड़ा किया, और जमीनों में काफी कुछ निवेश किए। और आयकर की टीम जांच में जुटी, तो कई बेनामी निवेश के खुलासे होने लगे।
आयकर की टीम ने 42 ठिकानों पर छापे डाले हैं। आमतौर पर जांच दो-तीन दिनों में ही पूरी हो जाती है लेकिन यह छापा लंबा चला और आयकर की टीम हफ्ते भर तक जांच करती रही। कारोबारी अग्रवाल परिवार के सीए के यहां भी आयकर टीम ने दबिश दी। यह बात छनकर सामने आई है कि स्टील कारोबारी ने अपने ड्राइवर, नौकर-चाकरों के नाम से करोड़ों रुपए निवेश किए हैं। उनके नाम पर करीब 20 से अधिक बैंक खातों का पता चला है। यानी नौकर-चाकर भी कागजों में करोड़पति बन गए हैं।
आयकर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में बेनामी निवेश का अब तक का सबसे बड़ा मामला है। कारोबारी परिवार राजधानी रायपुर के एक धार्मिक ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। जिसकी सत्ता की गलियारों में अच्छी-खासी दखल है। फिलहाल तो जांच-पड़ताल जारी है। कारोबारी कितना सरेंडर करते हैं, यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा।

कोपरा को मिली राष्ट्रीय पहचान
कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की रामसर सूची में शामिल कर लिया गया है। छत्तीसगढ़ के लिए यह उपलब्धि ऐतिहासिक है। बिलासपुर शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित कोपरा जलाशय पक्षियों, जलीय जीवों और वनस्पतियों का संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है। यहां प्रवासी पक्षियों की आवाजाही इस आर्द्रभूमि की समृद्धि को दर्शाती हैं, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गई है। पर्यावरण व पक्षी प्रेमी इसकी लंबे समय से मांग कर रहे थे। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढक़र 96 हो गई है। मगर, रामसर दर्जा मिलने के बाद लोगों को आदत डालनी होगी कि जलाशय की सुरक्षा की जाए। वन विभाग ने एक बोर्ड लगाकर चेतावनी दे दी है, जिसमें बताया गया है कि अतिक्रमण, प्रदूषण, शिकार और प्राकृतिक संतुलन से छेड़छाड़ जैसी गतिविधियों पर जेल भी हो सकती है। कोपरा जलाशय से कुछ दूर से ही नेशनल हाईवे निकली है। हालांकि शिकारियों को रोकने के लिए ग्रामीण पहले से ही सतर्क हैं, पर गाडिय़ों के धुएं और शोर की समस्या अब भी बनी हुई है। ([email protected])


