राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 25 मई। मुस्लिम समाज जामा मस्जिद के सदर एवं सामाजिक चिंतक रईस अहमद शकील साहब ने इस वर्ष हज-ए-बैतुल्लाह के मुबारक और मुकद्दस सफर पर रवाना हो रहे लोगों को मुबारक दी और कहा कि यह इनके जीवन का एक बेहद अहम, रूहानी और बरकतों से भरपूर अवसर है, जिसे वह गहरी आस्था, अदब और तवक्कुल के साथ अंजाम देने जा रहे हैं। इस पवित्र यात्रा के दौरान सभी हाजी साहेबान अपने शहर, समाज, मुल्क और पूरी दुनिया के लिए अमन, सुकून, भाईचारे, मोहब्बत और खुशहाली की खास दुआ मांगेंगे। रईस अहमद शकील ने कहा कि हज केवल एक इबादत नहीं, बल्कि इंसान की रूहानी तरबियत, अखलाकी इस्लाह और इंसानियत की खिदमत का सबसे बड़ा जरिया है।
उन्होंने कहा कि इस्लामी हज का महीना इस्लामी हिजरी कैलेंडर का 12वां और अंतिम महीना जुल-हिज्जा कहलाता है। इस महीने को हज का महीना इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वार्षिक हज तीर्थयात्रा 8वीं से 12वीं तारीख तक इसी दौरान होती है, इसलिए जुल-हिज्जा इसे हज तीर्थयात्रा का महीना भी कहा जाता है। यह इस्लामी कैलेंडर का 12वां महीना है। इसी महीने में ईद-उल अजहा (बकरीद) भी मनाई जाती है, इसलिए यह हज का मुकद्दस सफर ... हज करने वालों के लिए सिर्फ एक धार्मिक फरीजा नहीं, बल्कि एक रूहानी तजुर्बा, आत्म-शुद्धि और नए इमानी एहसास का जरिया भी है। इस दौरान वह पूरी इंसानियत के लिए रहमत, अमन और मोहब्बत की दुआ करेंगे। ये यकीन है कि जब समाज में अदल, इंसाफ और रहम-दिली का निजाम मजबूत होता है, तो दुनिया में खुद-ब-खुद सुकून और तरक्की पैदा होती है।
जामा मस्जिद के मीडिया प्रभारी सैय्यद अफज़ल अली ने कहा शहर जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी और तमाम कमेटी के मुतवल्लियान, ईमाम हजरात, कमेटी ओहदेदार, मेंबर, जमातियों और तमाम हाजियों के अहबाब, अहल-ए-खाना और चाहने वालों ने हज में जाने वाले हाजियों को इस मुबारक सफर के लिए दिली मुबारकबाद और नेक तमन्नाएं दी है।


