रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर,11 अप्रैल। प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों पर महंगाई की मार गहराती जा रही है। निर्माण सामग्री की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी होने से ठेकेदारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बिना रेट रिवाइज हुए काम जारी रखना मुश्किल बताया जा रहा है। ठेकेदारों ने काम बंद करने तक का ऐलान कर दिया है।
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन की शुक्रवार को कोर कमेटी की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने की।
तीन घंटे से अधिक चली बैठक में ठेकेदारों ने एक स्वर में कहा कि जिन कार्यों के टेंडर स्वीकृत होकर वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, उन्हें मौजूदा दरों पर पूरा करना संभव नहीं है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और पश्चिमी देशों में जारी युद्ध के कारण डामर, लोहा और एल्युमिनियम जैसी सामग्री की कीमतों में भारी उछाल आया है, जो टेंडर दरों से 20-25 फीसदी तक अधिक है। ऐसे में काम जारी रखने पर ठेकेदारों के कर्ज में डूबने की आशंका जताई गई।
कोर कमेटी ने निर्णय लिया है कि मुख्यमंत्री सहित संबंधित विभागों के मंत्री, सचिव, प्रमुख अभियंता और मुख्य अभियंताओं को ज्ञापन सौंपकर टेंडर शर्तों में रेट रिवाइज करने की मांग की जाएगी।
अध्यक्ष शुक्ला ने बताया कि गर्मी का मौसम सडक़ों के डामरीकरण का पीक सीजन होता है, लेकिन इसी समय डामर की कीमत 50 हजार रुपये प्रति टन से बढक़र 84 हजार रुपये तक पहुंच गई है। सडक़, ब्रिज और भवन निर्माण पर असर पड़ रहा।प्रदेशभर में खराब सडक़ों की मरम्मत और डामरीकरण के लिए करोड़ों के टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन डामर की किल्लत और बढ़ी हुई कीमतों के कारण ये कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वहीं लोहा महंगा होने से ओवरब्रिज और अंडरब्रिज निर्माण में भी दिक्कत आ रही है।इसके साथ ही गैस की कमी के कारण टाइल्स कटिंग जैसे कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। कई विभागों ने टेंडर की तारीखें आगे बढ़ाने का फैसला लेना होगा।


