रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 30 जनवरी। छत्तीसगढ़ कोसरिया अहीर यादव सेवा समाज 7 वां वार्षिक मंडी की देवी मड़ई (गहिरा मड़ई) का आयोजन कर रहा है।वर्ष 2026 में सातवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष हर्ष यादव ने मड़ई का शुभारंभ रायपुर स्थित श्री हरदेव लाला मंदिर प्रांगण से विधि-विधानपूर्वक किया जाएगा। समापन बाबा हटकेश्वर नाथ धाम, महादेवघाट में होगा, जहाँ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राऊत नाच और गहिरा मड़ई दलों को नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर प्रथम पुरस्कार 16,000, द्वितीय 11,000, तृतीय 7,000, चतुर्थ 5,000 तथा अन्य सभी दलों को 3,000 का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। पारंपरिक वेशभूषा में आए यादव ने बताया कि लोकपरंपरा का गहिरा मड़ई आज छत्तीसगढ़ की पहचान बनते हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे का सशक्त माध्यम बनेगा। गहिरा मड़ई केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि योद्धाओं की वीरता, साहस और आत्मबल का प्रतीक है। चंडी ताल की तेज लय पर लाठी और तलवार के साथ कलाकार जिस शौर्य का प्रदर्शन करते हैं, वह छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक युद्ध परंपरा की याद दिलाता है। माना जाता है कि पुराने समय में योद्धा युद्धभूमि की ओर इसी प्रकार गाते-बजाते और ललकारते हुए जाते थे।
समय के साथ गहिरा मड़ई में रास नृत्य और कथात्मक प्रस्तुतियों का भी समावेश हुआ है। राधा-कृष्ण एवं गोप-गोपियों से जुड़े संयोग-वियोग और श्रृंगार रस पर आधारित दोहों के साथ किया जाने वाला यह नृत्य दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। इसके साथ ही नीति-निर्देशक दोहे समाज को सदाचार और नैतिक मूल्यों का संदेश भी देते हैं। इस आयोजन का एक विशेष पहलू परेतीन दाई से जुड़ी लोकमान्यता है। मान्यता के अनुसार बाजार-हाट की पहली बोहनी परेतीन दाई द्वारा किए जाने से समृद्धि आती है।


