रायपुर

नशे में इस्तेमाल इन वस्तुओं को पान, किराने, व चाय की दुकानों कैफे, रेस्टोरेंट में बेचने पर रोक
30-Jan-2026 6:42 PM
नशे में इस्तेमाल इन वस्तुओं को पान, किराने, व चाय की दुकानों कैफे, रेस्टोरेंट में बेचने पर रोक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 30 जनवरी। पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने अपने न्यायालयीन अधिकारों का प्रयोग करते हुए आज पहला प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया।धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत उन्होंने रोलिंग पेपर गोगो स्मोकिंग कोन, पर्फेक्ट रोल के उपयोग की रोकथाम की दृष्टि से इसके पान की दुकान, परचून/किराने, व चाय की दुकानों कैफे, रेस्टोरेंट जैसे सहज उपलब्ध स्थानों से विक्रय पर रोक लगा दी है। यह रोक मार्च अंत तक लागू रहेगी।

डॉ. शुक्ला ने कहा कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ज्ञापनों, सामाजिक संगठनों व जनसामान्य से यह तथ्य प्रकाश में आया कि शहर में नाबालिकों/युवाओं द्वारा विभिन्न प्रकार के नशे (चरस, गांजा आदि) के सेवन हेतु रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन, पर्फेक्ट रोल का चलन बढ़ गया है, मादक पदार्थ (घरस, गांजा आदि) को सुगमता से अपने साथ रखने, छुपाने व सेवन करने का आसान / सरल तरीका है। इसमें टाईटेनियम ओक्साईड, पोटेशियम नाईट्रेट, आर्टिफिसियल डाई, केल्शियम कार्यानेट तथा क्लोरिन ब्लीच जैसे जहरीले पदार्थ पाये जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिये बेहद हानिकारक है। रोकथाम की दृष्टि से इसके पान की दुकान, परचून/किराने, व चाय की दुकानों कैफे, रेस्टोरेंट जैसे सहज उपलब्ध स्थानों से विक्रय पर प्रतिबंधित किये जाने की तत्काल आवश्यकता प्रतीत हो रही है।

यह आदेश तत्त्काल प्रभावी होगा और यदि बीच में वापस ना लिया गया तो,  29 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। इस आदेश अथवा इस आदेश के किसी अंश का उल्लंघन करना यथास्थिति अन्य अधिनियमों के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।

 

बघेल ने उठाए सवाल

प्रतिबंध के इस आदेश पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने  शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस आदेश को अजब-गजब आदेश करार देते हुए कहा कि इससे यह साफ हो गया कि सरकार अब खुद मान रही है कि रायपुर में गांजा, चरस जैसे नशीले पदार्थों का सेवन बड़े पैमाने पर हो रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह वैसा ही है जैसे शराब की खपत  कम करने के लिए डिस्पोजल या कांच के गिलास और चखने की बिक्री पर ही प्रतिबंध लगा दिया जाए?।बघेल ने यह भी पूछा कि आदेश सिर्फ 29 मार्च 2026 तक, यानी दो महीने के लिए ही क्यों लागू किया गया है।अगर  सरकार वास्तव में गंभीर है, तो इसे स्थायी आदेश क्यों नहीं बनाया गया।उनका कहना है  कि इस आदेश में लिखा है कि यदि बीच में वापस ना लिया गया को भी संदेह के घेरे में रखा और पूछा कि आखिर ऐसा कौन है जो इसे बीच में वापस ले सकता है। वैसे नशा सिफऱ् रायपुर में नहीं, पूरा छत्तीसगढ़ इसकी गिरफ़्त में है. यदि सरकार गंभीर है तो गंभीर आदेश निकालिए, मीडियाबाज़ी के लिए सरकार के पास बहुत इंवेंट हैं।


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