रायपुर
सीधे शासन के आदेश से संशोधन का प्रस्ताव, निगाहें राजभवन की ओर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 9 अगस्त। उच्च शिक्षा विभाग ने दो विषय में पूरक (यानी चार पेपर) की पात्रता देने की कवायद शुरू कर दी है। हालांकि यह आसान नहीं है और विवि अधिनियम के जानकार तो इसे खारिज कर रहे हैं। नियमों की पेचीदगी इतनी है कि इस सत्र में तो लगभग असंभव है।
आयुक्त उच्च शिक्षा ने दो विषय में अध्यादेश तैयार कर लिया है। इसे उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल की सहमति के लिए भेज दिया गया है । उसके बाद सीएम भूपेश बघेल को भेजा जाएगा। और फिर विश्वविद्यालयों को भेजकर उनके परीक्षा नीति में संशोधन अध्यादेश जारी कराया जाना है। यह पूरी प्रक्रिया विवि एक्ट के ठीक विपरीत अपनाई जा रही है। यानी उपर से नीचे विवि अधिनियम कहता है कि परीक्षा नीति में संशोधन के पहले शिक्षा परिषद, फिर कार्यपरिषद के अनुमोदन के बाद कुलाधिपति ,उच्च शिक्षा मंत्री वाली विवि समन्वय समिति से मंजूरी लेनी होती है । लेकिन इस संशोधन पर ठीक विपरीत प्रक्रिया हो रही है।
बहरहाल विभाग ने कल सभी 10 राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कुलसचिवों की इस पर बैठक बुलाई है। इसमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा और विभाग के प्रस्ताव से अवगत करा सभी से सहमति ली जाएगी। वैसे रायपुर रविवि के कुलपति प्रो.सच्चिदानंद शुक्ला ने कुलसचिव के जरिए अपनी सहमति भेज दी है। बताया जा रहा है कि यह केवल इसी एक सत्र के लिए संशोधन किया जा रहा है । इसके लिए सभी 10 राजकीय विवि अध्यादेश -6 जारी करेंगे।
कुलाधिपति रोक सकते हैं
उच्च शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को कुलाधिपति और राज्यपाल हरिचंदन रेक सकते हैं। जो अध्यादेश या संशोधन समन्वय समिति के जरिए शासन को भेजकर मंजूर/लागून कराया जाता है उसे विभाग या शासन सीधे कैसे लागू कर सकता है । राजभवन के सूत्र इसे कुलाधिपति केन अधिकारों में हस्तक्षेप किया जाना बता रहे हैं । ऐसे में विभाग के आदेश के राजभवन के रूख पर निगाहें होंगी।
तीन दशक बाद बदलाव होगा
रविवि के जानकार सूत्रों ने बताया कि दो विषय में पूरक का अवसर देने का यह संशोधन करीब तीन दशक बाद होने जा रहा है । मई1964 में स्थापित रविवि में पहले एक विषय और फिर एक प्रश्न पत्र में पूरक की व्यवस्था रही है। उसके बाद 1985-90 के दशक में दो विषय किया और फिर उसके बाद से अब तक एक विषय की व्यवस्था चल रही है। यह व्यवस्था अन्य नौ राजकीय विवि में भी लागू है। ये सभी राज्य गठन के बाद स्थापित हुए हैं। यह पूरक स्नातकोत्तर (पीजी) में नहीं है ।
सालाना 80 हजार से अधिक देते हैं पूरक
जानकार सूत्र बताते हैं कि प्रदेश के विवि में हर वर्ष 80 हजार से एक लाख विद्यार्थियों को पूरक परीक्षा देते हैं। वार्षिक परीक्षाओं में लगभग 60 फीसदी विद्यार्थी उत्तीर्ण, 30 प्रतिशत अनुउत्तीर्ण, और 18 से 20 प्रतिशत को पूरक मिलता है। यह स्नातक कक्षाओं के लिए है। वहीं सेमेस्टर पद्धति में एक से अधिक विषय में कम प्राप्तांक पर एटीकेटी का प्रावधान है। इस तरह से यह संशोधन होने पर इन 1 लाख विद्यार्थियों को अवसर मिलेगा।
यह बदलाव अच्छा है-प्रो. शुक्ला
रविवि के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने छत्तीसगढ़ से कहा कि शासन स्तर पर इस बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। चूंकि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षण व्यवस्था देने के लिए है इसलिए यह बदलाव अच्छा है। कोरोना के बाद ऐसी स्थिति निर्मित हुई है इसलिए छात्रों को अतिरिक्त अवसर दिया जा रहा है। हमने कुलसचिव के जरिए अपनी सहमति भिजवा दी है।


