रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 13 जुलाई। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में गुरुवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि हमें यह जीवन उत्तम साधना आराधना के लिए मिला है लेकिन हम क्या कर रहे हैं, हम शरीर पर लीपापोती करके घूम रहे हैं। हमें उत्तम साधना आराधना के लिए अत्यधिक पुण्य की जरूरत होती है।
आज हम मंदिर जाना छोडक़र पिकनिक पार्टी में जाने को प्राथमिकता देते हैं और उसमें भी हम कपड़ों की मैचिंग करते हैं। पेंट-शर्ट की मैचिंग करते हैं, कंगन बिंदिया की मैचिंग करते हैं यहां तक कि जूते चप्पल की भी मैचिंग करते हैं। जब से हमारा जन्म हुआ तब से हम मैचिंग के चक्कर में उलझे हुए हैं। हमें भौतिक मैचिंग नहीं करनी है, हमें आध्यात्मिक जगत में परमात्मा को पाने की मैचिंग करनी है। पारिवारिक जीवन में भी हमें मैंचिंग करनी होगी देवरानी को जेठानी से, पिता को पुत्र से और सास को बहू से व्यवहारिक मैचिंग करने की आवश्यकता है।
साध्वीजी कहती है कि एक स्कूल जाने वाला बच्चा छुट्टी होने पर घर लौट आता है। सुबह सूर्य का उदय होता है और शाम को वह भी अस्त हो जाता है। ऐसे ही चिडिय़ा सुबह दाने की तलाश में निकलती है और शाम को वापस अपने घोंसले में लौट जाती है। गाय भी दिन भर घूम कर शाम को अपने मालिक के पास ही लौटती है। अब आप विचार कीजिए कि प्रकृति की प्रवृत्ति भी घूम कर वापस लौटने की है तो आप कब तक इस जीवन ताल में भटकते रहोगे।
आपको भी अब आध्यात्मिक जगत की ओर लौटना होगा क्योंकि यह 5 महीने का सीजन ही धर्म का है और इससे अच्छा अवसर और कोई नहीं हो सकता है।
साध्वीजी कहती है कि आपको हर सुबह माता-पिता से आशीर्वाद लेना चाहिए। परमात्मा के दर्शन के लिए आप अपने आराध्य का दर्शन कर लेते हो। अपने आराध्य के दर्शन की व्यवस्था भी आप मंदिरों में कर लेते हो लेकिन गुरु के दर्शन तब ही होते हैं जब वह आपके नगर में होते हैं। शरीर का निर्माण तो मां की कोख में हो जाता है पर जीवन का निर्माण गुरु के चरणों में होता है। आप सभी के जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है और यदि उस उतार-चढ़ाव को सहने की ताकत आपके अंदर है इसका मतलब यह है कि गुरु का आशीर्वाद आप पर बना हुआ है।


