रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 13 जुलाई। चुनाव के महज कुछ महीने पहले कांग्रेस द्वारा प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष मोहन मरकाम जी लगातार कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुखर रहे। उन्होंने डीएमएफ समेत भूपेश सरकार के अनेक भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। इस भ्रष्टाचारी सरकार को यह पसंद नहीं आया और साजि़श करके उन्हें पद से हटाया गया है। यह निहायत ही अनुचित है।
कांग्रेस के भीतर नाम मात्र का भी आंतरिक लोकतंत्र नहीं बचा है। ख़तरनाक है यह। आदिवासी समाज का अपमान है।
मरकाम जी कांग्रेस के संविधान के तहत प्राप्त अधिकार का उपयोग करते हुए पार्टी को चलाने का काम कर रहे थे। इस कारण वे दस जनपथ के निशाने पर थे। कांग्रेस के संविधान के विरुद्ध प्रभारी ने पहले तो आदेश निकाल कर इन्हें अपमानित कर दबाने की कोशिश की, फिर भी अपने सम्मान के लिए मुखर रहे मरकाम जी झुके नहीं तो उन्हें इस तरह अपमानित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। यह निंदनीय है। कांग्रेस में अब मरकाम जी को रहना नहीं चाहिए। उन्हें छोड़ देनी चाहिये कांग्रेस।
आप बहुत याद आएंगे मरकामजी
भाजपा के वरिष्ठ नेता राम विचार नेताम ने अपमानित कर के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम को निकाला जाना निंदनीय है। यह इसलिए भी और अधिक निंदनीय है क्योंकि वे कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम कर रहे थे। प्रदेश की जनता, विशेषकर आदिवासी, पिछड़ों के हक का हिस्सा लूट लेने का वे विरोध करते रहे थे। मरकाम जी के अपमान से समाज में फैले आक्रोश को मैनेज करने में लिये उन्हें मंत्री पद का झुनझुना थमाने की कोशिश है। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने ट्वीट कर कहा मोहन मरकाम की मार्मिक विदाई के नाटक का दुखत अंत हो गया है। बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे हम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले। न खुदा मिला, न विसाले सनम, न इधर के रहे न उधर के। आप बहुत याद आएंगे मरकामजी।


