रायपुर
साइंस-डिग्री गल्र्स में 90 फीसदी से नीचे अंक पर दाखिला नहीं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 22 सितंबर। कॉलेजों में प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए सीबीएसई से पास विद्यार्थियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है, और वे माध्यमिक शिक्षा मंडल के विद्यार्थियों से पिछड़ रहे हैं। कोरोना की वजह से किसी भी बोर्ड ने परीक्षाएं नहीं ली थी, और अलग-अलग तरीके अपनाकर नतीजे घोषित कर दिए। हाल यह है कि मंडल के विद्यार्थियों को सीबीएसई अथवा आईसीएसई के विद्यार्थियों की तुलना में ज्यादा अंक मिले, और बारहवीं के प्राप्तांक के आधार पर वो कॉलेज दाखिले में बाजी मार ले रहे हैं।
कॉलेजों में प्रथम वर्ष में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। इंजीनियरिंग और मेडिकल को छोडक़र बाकी कॉलेजों में प्रवेश 12वीं के प्राप्तांक के आधार पर दिया जाता है। साइंस, कॉमर्स, और आर्टस व अन्य विषयों में दाखिले के लिए सूची जारी हो रही है। रायपुर के प्रतिष्ठित सरकारी कॉलेज नागार्जुन साइंस कॉलेज, डिग्री गल्र्स कॉलेज, छत्तीसगढ़ कॉलेज, और अनुदान प्राप्त दुर्गा कॉलेज में 2 सूची जारी हो चुकी है। हाल यह है कि इन कॉलेजों में बारहवीं में 85 फीसदी से नीचे के विद्यार्थियों को दाखिले के लिए काफी जदेजहद करनी पड़ रही है।
साइंस कॉलेज में अलग-अलग विषयों में न्यूनतम 90 फीसदी से अधिक अंक वालों को ही प्रवेश दिया गया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट कुछ जरूर खाली है, जिनमें किसी का आवेदन नहीं आने पर सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। यही हाल, छत्तीसगढ़ कॉलेज का भी है। यहां भी कमोवेश वही स्थिति है। कुछ विषयों में जरूर 80 फीसदी प्राप्तांक के आधार पर प्रवेश मिल रहा है, लेकिन ज्यादातर विषयों में इससे अधिक को ही दाखिला मिल रहा है।
बताया गया है कि सीबीएसई बोर्ड के विद्यार्थियों के अंक इस बार माध्यमिक शिक्षा मंडल से विद्यार्थियों से कम आए हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कोरोना की वजह से घर में ही प्रश्नपत्र हल करने की अनुमति दी थी। जबकि सीबीएसई बोर्ड ने जनरल प्रमोशन दिया था, और पुराने रिकॉर्ड देखकर नतीजे दिए थे। सीबीएसई बोर्ड के विद्यार्थियों के अंक कम आए हैं। जबकि माध्यमिक शिक्षा मंडल के विद्यार्थियों का भरपूर अंक मिले हैं। कई विद्यार्थियों को सौ फीसदी अंक प्राप्त हुए हैं। मंडल के 70 फीसदी से अधिक विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में पास हुए हैं।
कॉलेजों में बारहवीं के प्राप्तांक के आधार पर दाखिला होता है। इसमें बोर्ड का फर्क नहीं किया जाता। और आईसीएसई, सीबीएसई हो या माध्यमिक शिक्षा मंडल के विद्यार्थियों को बारहवीं के अंक के आधार पर प्रवेश होता है। इस बार माध्यमिक शिक्षा मंडल के विद्यार्थियों को ज्यादा संख्या में प्रवेश मिल रहा है। क्योंकि उन्हें अंक बेहतर मिले हैं। साइंस कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े डॉ. बीजी शर्मा का कहना है कि हमेशा से ही सीबीएसई के विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ता है। क्योंकि माध्यमिक शिक्षा मंडल के नतीजे बेहतर होते हैं। प्रवेश परीक्षा जैसा कोई नियम नहीं होने के कारण सीबीएसई के कम संख्या में विद्यार्थियों को दाखिला मिल पाता है।
छत्तीसगढ़ कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. तपेश चंद गुप्ता ने कहा कि इस बार जितनी मारामारी पहले कभी नहीं हुई। वजह यह है कि कोरोना की वजह से परीक्षाएं नहीं हो पाई और विद्यार्थियों को भरपूर अंक मिल गया। सीबीएसई बोर्ड ने अपने विद्यार्थियों को अंक देने में थोड़ी कड़ाई बरती है, और इसका नुकसान कॉलेज दाखिले में उठाना पड़ रहा है। लेकिन बोर्ड के रिजल्ट में फर्क करने का कोई नियम नहीं है। सबको सामान अवसर दिया जाता है। विशेषकर सीबीएसई के विद्यार्थियों को अच्छे कॉलेजों में दाखिले के लिए भटकना पड़ रहा है, और उन्हें प्रवेश परीक्षा जैसी कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है।


