नारायणपुर

बूंद-बूंद पानी को तरसता अबूझमाड़ का कारकानार, झरिया और नालों का पानी पीने मजबूर ग्रामीण
13-May-2026 4:26 PM
बूंद-बूंद पानी को तरसता अबूझमाड़ का कारकानार,  झरिया और नालों का पानी पीने मजबूर ग्रामीण

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नारायणपुर, 13 मई। नारायणपुर जिले से लगभग 25 किलोमीटर दूर अबूझमाड़ ब्लॉक के कलमानार पंचायत के आश्रित गांव कारकानार में ग्रामीण पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में करीब 250 ग्रामीण निवास करते हैं और उन्हें पीने के पानी के लिए झरिया और नालों पर निर्भर रहना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार, गर्मी के मौसम में महिलाओं को पानी लाने के लिए 2 से 3 किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता है। उनका कहना है कि गांव में लगाया गया हैंडपंप काम नहीं कर रहा है। वहीं, जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए नलों से अब तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पेयजल व्यवस्था के लिए प्रशासन को कई बार आवेदन दिया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है और बरसात के मौसम में सडक़ और पुल-पुलिया नहीं होने के कारण आवागमन प्रभावित हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बिजली के खंभे और तार लगाए गए हैं, लेकिन अब तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। उनका कहना है कि बारिश के दिनों में गांव तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

इस संबंध में नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि कलमानार क्षेत्र पहले नक्सल प्रभावित रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में एक माह पहले बोरवेल और हैंडपंप की व्यवस्था कराई गई थी। कलेक्टर ने कहा कि यदि हैंडपंप बंद है तो उसकी जांच कराई जाएगी और एक सप्ताह के भीतर उसे चालू कराने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत नई सडक़ों का सर्वे किया जा रहा है और स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। उनका कहना था कि प्रशासन का प्रयास है कि गांवों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जाएं।

ग्राम पंचायत झारावाही के पूर्व सरपंच लच्छूराम कोर्राम ने कहा कि कारकानार गांव में पानी और बिजली की समस्या है। उनके अनुसार, ग्रामीण खेतों में जमा पानी का उपयोग करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई गांवों में नल-जल योजना के तहत नल लगाए गए हैं, लेकिन पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है।

स्थानीय महिला ग्रामीण शांति कश्यप ने बताया कि गांव के लोग एक ही जलस्रोत का उपयोग पीने, नहाने और पशुओं के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में रास्ते खराब हो जाते हैं और बीमार होने पर अस्पताल पहुंचने में परेशानी होती है। स्थानीय ग्रामीण दिनेश मंडावी ने बताया कि गांव में लगभग 250 की आबादी है और ग्रामीण पहाड़ से आने वाले पानी पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि गांव में लगभग 10 वर्ष पहले बिजली के खंभे और तार लगाए गए थे, लेकिन अब तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने गांव में शुद्ध पेयजल, सडक़ और बिजली सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।


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