महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 5 जून। खाद-बीज के संकट और अव्यावहारिक प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ कल शाम छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस जिला इकाई ने मोर्चा खोल दिया। जिला अध्यक्ष मानिक साहू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए किसान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और अन्नदाताओं ने कांग्रेस भवन से रैली की शक्ल में एसडीएम दफ्तर तक जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान गगनभेदी नारों के साथ प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया और रैली के अंत में मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को एक 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया।
सौंपे गए ज्ञापन में किसान कांग्रेस ने मैदानी हकीकत बयां करते हुए कहा कि आज जिले का छोटा-बड़ा हर वर्ग का किसान सुबह घर से एक उम्मीद लेकर सोसायटियों और बाजारों की तरफ निकलता है कि शायद उसे खेती के लिए डीएपी खाद या ट्रैक्टर के लिए डीजल मिल जाएगा। परंतु दुर्भाग्य से शाम तक उसके हाथ में सिर्फ लंबी लाइनें, धक्के, प्रशासनिक बहाने और भारी मजबूरी ही लगती है। जिस अन्नदाता की मेहनत से मंडियां भरती हैं, आज वही खाद के एक-एक कट्टे के लिए तरस रहा है। ंगठन ने मंत्रियों के दौरों और प्रशासनिक दावों पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि मंत्रियों का स्वागत करने, बड़े-बड़े राजनैतिक भाषण देने और फ ोटो खिंचवाने से फुर्सत नहीं हैं। राजनीति से परे अब हमें धरातल पर उतरना होगा, क्योंकि केवल स्वागत-सत्कार से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। जब भाषण देना होता है तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, पर जब जमीनी स्तर पर किसान खाद, बीज और डीजल के लिए रोता है, तब पूरी प्रशासनिक व्यवस्था मौन हो जाती है। रसूखदार लोग अपनी पहचान के बल पर व्यवस्था कर लेते हैं लेकिन आम और गरीब किसान परेशान हैं।
मांग पत्र में प्रमुख रूप से शासन द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए प्रति एकड़ केवल 1 बोरी खाद की पात्रता के नियम का कड़ा विरोध किया गया है। किसान कांग्रेस ने इसे पूरी तरह से अव्यावहारिक और किसान विरोधी बताते हुए तुगलकी फरमान करार दिया है। संगठन ने मांग की है कि इस नियम को तत्काल निरस्त किया जाए और किसानों को उनकी भूमि व फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही डीजल किल्लत दूर करने, कृषि बिजली दरों को नियंत्रित करने, धान की एकमुश्त राशि का भुगतान करने और लंबित विभागीय अनुदान को जल्द जारी करने जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई गई हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि जिले के अन्नदाताओं के इस गहरे दर्द और आक्रोश को संज्ञान में लेते हुए त्वरित निराकरण नहीं किया गया, तो संगठन आगे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।


