महासमुन्द

बीते वर्ष 18 सौ में बिका था धान, इस बार 1730 में अटकी बोली, मंडी में किसानों को करना पड़ रहा इंतजार
28-May-2026 2:45 PM
बीते वर्ष 18 सौ में बिका था धान, इस बार 1730 में अटकी बोली, मंडी में किसानों को करना पड़ रहा इंतजार

छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 28 मई। रबी सीजन में धान बेचने कृषि उपज मंडी पहुंचे किसान इन दिनों अव्यवस्था और खरीदी प्रक्रिया की सुस्ती से परेशान हैं। जिले के विभिन्न गांवों से किसान ट्रैक्टर, पिकअप और मिनी ट्रकों में धान लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। लेकिन पर्याप्त राइस मिलर्स नहीं पहुंचने से नीलामी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसका असर सीधे किसानों को मिलने वाले दाम पर पड़ रहा है। बीते वर्ष रबी फसल का धान 18 सौ प्रति क्विंटल में बिका था। इस बार 1730 में बोली अटकी पड़ी है। मंडी में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है।

मंडी परिसर में इन दिनों धान से भरे वाहनों में किसान सुबह से लेकर देर शाम तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ किसानों को दो से तीन दिन तक मंडी में रुकना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और 44-45 डिग्री तापमान के बीच खुले आसमान के नीचे इंतजार करना किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। किसानों का कहना है कि मंडी में पंजीकृत राइस मिलर्स की संख्या काफी अधिक है, लेकिन खरीदी के दौरान केवल कुछ ही मिलर्स सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

इस तरह प्रतिस्पर्धा कम होने से धान की बोली भी कम लग रही है। किसानों ने आरोप लगाया है कि मजबूरी में उन्हें बाजार मूल्य से कम दर पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए किसानों ने बताया कि खेती में पहले ही लागत बढ़ चुकी है। बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई खर्च बढऩे के बाद अब परिवहन खर्च भी किसानों पर अतिरिक्त बोझ बन रहा है। डीजल की कीमत और भाड़ा बढऩे के कारण मंडी तक धान पहुंचाने में ही काफी राशि खर्च हो रही है। ऐसे में यदि धान का उचित मूल्य नहीं मिला तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

कई किसानों ने यह भी कहा कि मंडी में पर्याप्त खरीदार नहीं होने से बोली प्रक्रिया धीमी चल रही है। पहले अधिक मिलर्स पहुंचने से अच्छी प्रतिस्पर्धा रहती थी और किसानों को बेहतर कीमत मिल जाती थी, वहीं इस बार स्थिति विपरीत नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खरीदी नहीं हुई तो उन्हें मंडी में अतिरिक्त दिनों तक रुकना पड़ेगा। जिससे मजदूरी और भोजन जैसी दिक्कतें भी बढ़ रही हैं।

मंडी परिसर में सुविधाओं की कमी को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। पेयजल और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी सीमित दिखाई दे रही है। मंडी में कार्यरत अधिकारी कर्मचारियों का कहना है कि इस बार रबी धान की आवक लगातार बढ़ रही है। ऐसे में खरीदी व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मंडी में अधिक राइस मिलर्स की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए। किसान संगठनों द्वारा वर्षों से रबी सीजन के धान को भी समर्थन मूल्य में खरीदी करने की मांग की जा रही है। लेकिन सरकार इस संबंध में किसी भी प्रकार का विचार नहीं कर रही है। फलस्वरुप किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी है।

किसान नेता जुगनू चंद्राकर ने बताया कि हमें कम दाम पर धान बेचने मजबूर होना पड़ रहा है। मिलर्स न आने की वजह से मंडी बंद होने की कगार पर पहुंच जाती है। मिलर्स अपने राइस मिल में 100 रुपए अतिरिक्त में खरीदी कर रहे हैं। लेकिन जब मंडी में खरीदी की बात हो रही तो 1650 से 1730 तक ही बोली सिमट रही है। जुगनू चंद्राकर ने बताया सौदा पत्रक में 17 प्रतिशत और अनुबंध पत्रक में 30 प्रतिशत धान ही बिका है।


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