महासमुन्द

प्रांतीय घोष वर्ग संगीत व वाद्य यंत्र प्रशिक्षण शिविर
21-May-2026 4:08 PM
प्रांतीय घोष वर्ग संगीत व वाद्य यंत्र प्रशिक्षण शिविर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 21 मई। छत्तीसगढ़ प्रांत के तत्वावधान में भलेसर रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में बीते 10 मई से 15 दिवसीय प्रांतीय घोष वर्ग संगीत व वाद्य यंत्र प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर के 11वें दिन 21 मई की शाम को महासमुंद नगर में स्वयंसेवकों द्वारा एक भव्य व अनुशासित पथ संचलन निकाला जाएगा। इस संचलन को लेकर नगरवासियों और संघ के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। प्रांत स्तर के इस प्रतिष्ठित शिविर में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से आए कुल 170 स्वयंसेवक शामिल हैं। इनमें 110 घोष के शिक्षार्थी हैं जो पूर्ण गणवेश धारण कर घोष की मधुर धुनों के साथ नगर की सडक़ों पर कदमताल करेंगे।

यह भव्य पथ संचलन गुरुवार शाम ठीक 6 बजे भलेसर रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर से प्रारंभ होगा। शिशु मंदिर से निकलकर यह संचलन शास्त्री चौक पहुंचेगा, वहां से बरोडा चौक, फिर नेहरू चौक होते हुए महामाया बाजार पारा की ओर बढ़ेगा।

इसके बाद संचलन महानाया मंदिर चौक से गांधी चौक और वहां से बजरंग चौक होते हुए आगे बढ़ेगा। नगर के प्रमुख मार्गों का भ्रमण करने के पश्चात पथ संचलन पुन: अपने उद्गम स्थल सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में पहुंचकर संपन्न होगा। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों पर समाज के प्रमुख लोगों और प्रबुद्ध जनों द्वारा पुष्पवर्षा कर संचलन का स्वागत किए जाने की तैयारी है।

इस 15 दिवसीय प्रांतीय शिविर का मुख्य उद्देश्य शिक्षार्थियों को उनकी रुचि के अनुरूप पारंपरिक और संघ के विशेष वाद्य यंत्रों के वादन में पारंगत करना है। वर्ग में स्वयंसेवकों के भीतर वादन कौशल विकसित करने के साथ-साथ घोष की ओजस्वी और मधुर धुनों के माध्यम से समाज में राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। वादन कौशल के अलावा इस प्रांतीय वर्ग में शामिल होने वाले स्वयंसेवकों को कड़े अनुशासन, व्यवस्था कौशल्य,सूक्ष्म समय प्रबंधन और निष्काम राष्ट्रसेवा के गहरे संस्कार भी दिए जा रहे हैं।

यह 15 दिवसीय प्रांतीय शिविर आगामी 24 मई तक संचालित होगा। समापन के अवसर पर रविवार को शाम 6 बजे से शिशु मंदिर परिसर में घोष प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस समापन समारोह में सभी शिक्षार्थी स्वयंसेवक वर्ग अवधि के दौरान सीखे गए विभित्र वाद्य यंत्रों के सामूहिक वादन की कला और विभिन्न रचनाओं धुनों का प्रदर्शन करेंगे। सामूहिक रूप से राष्ट्रभाव और अनुशासित कला का प्रकटीकरण किया जाएगा। जिसमें नगर के गणमान्य लोगों को भी आमंत्रित किया गया है।

शिविर में मुख्य रूप से सुरीली और सुमधुर धुनों के लिए बांसुरी, संचलन की गति और ताल निर्धारित करने के लिए ड्रम-आनक और प्रणव साइड ड्रम घोष को गति और लय देने के लिए होता है। शंख मांगलिक और ओजस्वी ध्वनि के लिए उपयोग किया जाता है। इस वृहद प्रांतीय आयोजन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए संघ द्वारा व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं। इस शिविर में छत्तीसगढ़ प्रांत के अलग-अलग जिलों से 10 शिक्षार्थी वाद्ययंत्रों का कड़ा अभ्यासा कर रहे हैं। 20 मुख्य शिक्षक जो वादन विधाओं के विशेषज्ञ हैं, वे प्रशिक्षण दे रहे हैं। 40 व्यवस्था प्रमुख शिविर में भोजन, आवास और अन्य आंतरिक व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं।


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