महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 20 मई। नौतपा की शुरुआत से पहले ही जिले में भीषण गर्मी के चलते तालााबों का पानी उबल रहा है। महासमुंद जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण अंचल के तालाबों में पानी तेजी से सूख रहा है। यहां तापमान 44 से 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है और निस्तारी तालाबों का पानी बेहद गर्म होने लगा है। पानी गर्म होने के कारण ऑक्सीजन की के कारण तालाबों में मछलियां भारी तादात में मर रही हैं। जिला मुख्यालय से लगे तुमगांव रोड सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों में दम घुटने के कारण मछलियों के मरने और उनके तड़पकर सतह पर आने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
मत्स्य पालन विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के इस मौसम में पानी कम होने से तालाबों की तली में जमा कीचड़ और गंदगी पानी में घुलने लगती है जिससे हानिकारक अमोनिया गैस का स्तर अचानक बढ़ जाता है। यही अमोनिया गैस पानी में ऑक्सीजन की किल्लत मछलियों के लिए साइलेंट किलर साबित हो रही है। खासकर उन तालाबों में संकट ज्यादा गहरा गया है,जहां पानी नाममात्र का बचा है और निस्तारी का दबाव अधिक है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस स्थिति से निपटने के लिए किसान सुबह 4 से 6 बजे के बीच तालाब के पानी में बांस चलाकर खुद तैरकर या एरिएटर पंप के जरिए हलचल पैदा करें, ताकि वातावरण की ऑक्सीजन पानी में घुल सके। इसके अलावा, जिन तालाबों के पास बोरवेल की सुविधा है, वहां तुरंत नया और ठंडा पानी रीचार्ज करें।
मत्स्य विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि तेज गर्मी के दौरान मछलियों को कृत्रिम आहार फीडिंग देना पूरी तरह बंद कर दें या बेहद कम कर दें। क्योंकि बचा हुआ चारा पानी में सडक़र उसे और जहरीला बना देता है। पानी के शुद्धिकरण के लिए प्रति एकड़ निर्धारित मात्रा में चूने या पोटेशियम परमैंगनेट के छिडक़ाव की भी सलाह दी गई है।
विभागीय जानकारी अनुासर स्थानीय मछुआरों के हितों के लिए जिले में लगभग 140 से 160 पंजीकृत मछुआरा सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जो नियमों के तहत शासकीय तालाबों का संचालन करती हैं। जिले के पारंपरिक मछुआरे धीवर, केंवट और निषाद समाज संंंंंंंंंंंंंंंहित लगभग 18 हजार से 22 हजार लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मछली पकडऩे, जाल बुनाई और इसके कारोबार से जुड़े हैं। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धति से खुद के निजी तालाबों में मछली पालन करने वाले उन्नत किसानों की संख्या भी जिले में लगभग 3 हजार 500 से 4 हजार 500 के आसपास है।
गौरतलब है कि महासमुंद जिला छत्तीसगढ़ में मत्स्य उत्पादन और उन्नत मछली बीज स्पॉन्स और फिंगरलिंग्स की आपूर्ति के मामले में एक बड़ा हब माना जाता है। यहां उत्पादित मछलियां ओडि़शा और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के बाजारों तक भेजी जाती हैं। ऐसे में अचानक मौसम के इस कड़े रुख ने हजारों परिवारों की आजीविका पर सवालिया निशान लगा दिया है। नुकसान को देखते हुए मत्स्य पालन विभाग ने जिले के मत्स्य कृषकों और समितियों के लिए आपातकालीन एडवायजरी जारी कर तुरंत सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है। महासमुंद जिले में लगभग 4 हजार 500 से 5 हजार छोटे-बड़े ग्रामीण तालाब हैं। जबकि जल संसाधन विभाग और जनपद के अंतर्गत करीब 150 सिंचाई जलाशय, बांध व बैराज हैं। जिन्हें मलय पालन के लिए पट्टे पर दिया जाता है।
मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गर्मी के दिनों में प्राकृतिक रूप से पानी में ऑक्सीजन का स्तर गिरना एक आम समस्या है। लेकिन समय से पहले बढ़ी तपिश ने चिंता बढ़ा दी है। मछुआरों और समितियों को मुस्तैद रहने को कहा गया है। यदि किसी भी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मछलियों के प्रभावित होने की जानकारी मिलती है, तो स्थानीय अमला तुरंत पानी की जांच और सुधार के लिए मौके पर पहुंचेगा।


