महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,10 मई। डेढ़ करोड़ की एलपीजी गैस चोरी के मामले में महासमुंद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में आरोपी अजय यादव जिला खाद्य अधिकारी, मनीष चौधरी व्यापारी और पंकज चंद्राकर एजेंसी संचालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पंकज चंद्राकर पूर्व राज्य मंत्री के बड़े भाई धनंजय चंद्राकर का दामाद है।
इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर इस ममले में फरार हैं। आरोप है कि जनता की संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों और निजी एजेंसी संचालकों ने मिलकर गबन की साजिश रची। पुलिस के मुताबिक घोटाले के लिए दोनों पक्षों के बीच 80 लाख रुपए में डील हुई थी।
महासमुंद एसपी प्रभात कुमार ने शनिवार की शाम को प्रेस कांफ्रेंस में अब तक की कार्रवाई का खुलासा किया। उन्होंने खुलासा किया कि जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव ने पुलिस द्वारा जब्त किए गए 6 एलपीजी गैस कैप्सूलों से करीब 1.5 करोड़ रुपए की गैस चोरी करने का मास्टर प्लान तैयार किया। इस षड्यंत्र में निजी गैस एजेंसी संचालक और बिचौलियों ने मिलकर सरकारी खजाने को चपत लगाई।
एसपी के मुताबिक शुरुआत दिसंबर 2025 को हुई जब सिंघोड़ा पुलिस ने अवैध परिवहन के संदेह में 6 एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया। पुलिस ने कैप्सूलों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा। इसे अजय ने अवसर में बदल लिया।
आरोप है कि 6 अप्रैल से 8 अप्रैल के बीच कैप्सूल टैंकरों से गैस खाली कर बाजार में बेची गई। इसके बाद महासमुंद स्थित खाद्य अधिकारी कार्यालय में बैठकर फर्जी पंचनामा तैयार किया गया। ताकि रिकॉर्ड में वजन और गैस की मात्रा को सामान्य दर्शाया जा सके।
पुलिस ने इस मामले में अभी तक सिर्फ 6 लाख रुपए के साथ आरोपियों के पास से मोबाइल फ ोन, नकदी और गबन के पैसों से खरीदे गए लाखों रुपए के घरेलू उपकरण बरामद किए गए हैं। सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धारा 316-3, 61, 238, 340-2 और आवश्यक वस्तु अधिनियम ईसी एक्ट की धारा 3, 7 के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। संबंधित पक्षों की भूमिका को लेकर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
इस मामले में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। दिसंबर 2025 में जब्त किए गए 6 कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी गई उसी दौरान अजय यादव ने गबन की योजना बनाई। जबकि गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर की भूमिका कथित रूप से संचालन और नेटवर्र्किंग की रही। पंकज ने अजय यादव के साथ मिलकर योजना बनाई और 23 मार्च को बाजार में खपाने खातिर आरोपियों की बैठक हुई। इस मामले में रायपुर निवासी मनीष चौधरी को कथित रूप से बिचौलिये की भूमिका में बताया गया है। आरोप है कि उन्होंने सौदे को अंतिम रूप दिलाने में मध्यस्थता की और खरीदार पक्ष से संपर्क स्थापित कराया।
पुलिस ने बताया कि इस सौदेबाजी में पैसों का बंटवारा किसी प्रोफेशनल गैंग की तरह किया गया था। अजय यादव को 50 लाख रुपए, पंकज चंद्राकर को 20 लाख रुपए (मैनेजमेंट और क्रियान्वयन के लिए) तथा मनीष चौधरी को 10 लाख रुपए नेटवर्किंग और बिचौलिया खोजने के लिए मिले थे। पुलिस ने अजय के घर से सिर्फ 1 लाख रुपए जब्त किया है।
पुलिस का कहना है कि खाद्य अधिकारी अजय यादव ने न केवल गैस चोरी करवाई बल्कि सबूत मिटाने के लिए पूरी प्रशासनिक मशीनरी को गुमराह भी किया। अपने विभाग के निरीक्षकों को स्पष्ट आदेश दिए थे कि वे सुपुर्दनामा के दस्तावेजों पर साइन न करें और ट्रकों का वजन न कराया जाए। जब 6 अप्रैल से 8 अप्रैल के बीच गैस खाली कर दी गई, तब खाद्य अधिकारी के कार्यालय में ही बैठकर फर्जी वजन पंचनामा तैयार किया गया।
रायपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालक संतोष सिंह ठकुर पर कथित रूप से गैस खरीदने का आरोप है। जानकारी के अनुसार, करीब 80 लाख रुपए में सौदा तय किया गया था। जांच में पता लगा कि कैप्सूल का वजन 8 अप्रैल की रात 8 बजे हुआ था। जबकि फर्जी पंचनामा दोपहर में ही कलेक्टोरेट कार्यालय में जमा हो चुका था। यानी वजन होने से पहले ही रिपोर्ट तैयार थी। 30 मार्च को ट्रकों का सुपुर्दनामा ठकुर पेट्रोकेमिकल को मिला।
इस तरह सिंघोड़ा पुलिस द्वारा जब्त की गई 102 मीट्रिक टन एलपीजी के गबन का मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। सरकारी पद का दुरुपयोग कर एक बड़े अफसर ने कागजों में हेर-फेर की। कलेक्ट्रेट के भीतर ही फर्जी पंचनामा तैयार किया गया। फर्जी पंचनामा में पंकज और मनीष ने हस्ताक्षर किया। वजन कांटा की असली पर्ची 8 अप्रैल की रात 8 बजे की गई और उससे पहले दोपहर को ही कलेक्ट्रेट के आवक-जावक रजिस्टर में पंचनामा दर्ज कर दिया गया।
शुरुआत में यह सौदा 1 करोड़ रुपए में तय करने की कोशिश की गई लेकिन अंतत:80 लाख रुपए में डील फ ाइनल हुआ। डील का सबसे बड़ा हिस्सा जिला खाद्य अधिकारी को मिला। पुलिस ने सख्ती दिखाई, तो आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए पैंतरा बदला और सारा दोष पुलिस और कैप्सूल टैंकर्स के लीकेज पर मढ़ दिया। लेकिन एसपी प्रभात कुमार की 40 सदस्यीय विशेष टीम और साइंटिफिक इंटरोगेशन के सामने यह साजिश टिक नहीं सकी।


