महासमुन्द

भुइयां पोर्टल में गांवों के नाम गड़बड़: किसी की गिरदावरी रिपोर्ट गलत, तो किसी का रकबा बदला
22-Apr-2026 4:54 PM
भुइयां पोर्टल में गांवों के नाम गड़बड़: किसी की गिरदावरी रिपोर्ट गलत, तो किसी का रकबा बदला

15-20 गांवों के किसान हलाकान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 22 अप्रैल।
छग शासन के राजस्व विभाग द्वारा किसानों की सुविधा के लिए शुरू किया गया भुइयां पोर्टल अब किसानों की परेशानी का कारण बनता जा रहा है। ऑनलाइन बी-1, खसरा और नक्शा जैसी महत्वपूर्ण जमीन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने वाले इस पोर्टल में लगातार सामने आ रही त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है।
  बसना विकासखंड के गांवों का जब पोर्टल पर अवलोकन किया गया, तो कई चौंकाने वाली खामियां उजागर हुईं। करीब 15 से 20 गांवों के नामों में गंभीर त्रुटियां दर्ज हैं। कहीं वर्तनी की गलती है तो कहीं नाम ही पूरी तरह बदल गया है। जिससे न केवल प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बन रही है बल्कि किसानों के जरूरी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

उक्त पोर्टल में बरतियाभांठा को बरिलियाभाठ, ठूठापाली को टूटापाली, बिछिया को विछिया, बिलखण्ड को बेलखंड, पौंसरा को पसरा, बम्हनीनडीह बम्हनीडीह, हबेकांटा को हवेकाटा, बिजराभांठा को विजरभाठा और भुवनेश्वरपुर को भुनेश्वपुर दर्ज किया गया है।
एक शासकीय आदेश में भी बरतियाभांठा का नाम बरलियाभाठ दर्ज कर दिया गया। जबकि बसना क्षेत्र में इस नाम का कोई गांव ही अस्तित्व में नहीं है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि पटवारी से लेकर आरआई और तहसीलदार तक प्रतिदिन इस पोर्टल पर कार्य करते हैं। इसके बावजूद इतनी स्पष्ट त्रुटियां उनकी नजरों से कैसे ओझल हैं, यह सवाल खड़ा हो रहा है।
किसानों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं इन त्रुटियों को जानबूझकर अनदेखा तो नहीं किया जा रहा।
मालूम हो कि इन गलत प्रविष्टियों का खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसी किसान की गिरदावरी रिपोर्ट गलत दर्ज होने से उसे धान बेचने में परेशानी उठानी पड़ रही है, तो किसी की जमीन को गलत तरीके से सिंचित या असिंचित दर्शा देने से केसीसी बनने में अड़चन आ रही है।

वहीं कई मामलों में नाम या जाति का उल्लेख नहीं होने से रजिस्ट्री प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। बंधक और रकबा संबंधी त्रुटियों के कारण बैंकिंग और ऋण कार्यों में भी बाधाएं सामने आ रही हैं।
किसानों का आरोप है कि इन त्रुटियों को सुधारने के लिए उन्हें बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सुधार प्रक्रिया जटिल होने के साथ-साथ समय और पैसा दोनों की बर्बादी साबित हो रही है।
किसानों का आरोप है कि त्रुटि सुधार अब एक कमाई का जरिया बन गया है। आने वाले समय में जब जमीन के रिकॉर्ड को आधार से जोड़ा जाएगा, तब ये छोटी-छोटी दिखने वाली गलतियां बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि शासन-प्रशासन इस ओर गंभीरता दिखाए और भुइयां पोर्टल की व्यापक जांच कर सभी त्रुटियों को शीघ्र दुरुस्त करे।

किसानों की शिकायत आने पर सुधार किया जा रहा है-आरआई
इस मामले में आरआई मनीष श्रीवास्तव का कहना है कि टंकण त्रुटि तो है। दर्ज करते समय शुरुआत में ही गड़बड़ी हुई है। किसानों की शिकायत आने पर सुधार किया जा रहा है।
 


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