महासमुन्द
महासमुंद, 21 अप्रैल। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा महिलाओं को अधिकार देने के बजाय परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेना है।
उन्होंने जारी विज्ञप्ति में आगे कहा कि वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को परिसीमन से जोडऩा उचित नहीं है। उनके अनुसार, सरकार चाहती है कि महिला आरक्षण के समर्थन के नाम पर विधेयक पारित हो और बाद में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू कर राजनीतिक समीकरण बदले जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में विधेयक पारित नहीं होने के बाद इसे मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि देश में महिलाओं को मताधिकार सहित कई संवैधानिक अधिकार पहले ही मिल चुके हैं। चंद्राकर ने प्रश्न उठाया कि जब 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो चुका है, तो नए विधेयक की आवश्यकता क्यों है। उन्होंने मांग की कि वर्तमान 543 लोकसभा सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए और इसे 2029 तक प्रभावी बनाया जाए।
उन्होंने ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की भी बात कही। साथ ही कहा कि यदि सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर है, तो मौजूदा संसदीय संरचना में ही इसे लागू करने के लिए विधेयक लाया जाए।


