महासमुन्द

राष्ट्रकवि माखन लाल चतुर्वेदी जयंती पर काव्य गोष्ठी
06-Apr-2026 5:09 PM
राष्ट्रकवि माखन लाल चतुर्वेदी जयंती पर काव्य गोष्ठी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,6 अप्रैल। आस्था साहित्य समिति महासमुंद द्वारा राष्ट्र कवि माखनलाल चतुर्वेदी जयंती अवसर पर युद्घ और शांति पर काव्य गोष्ठी का आयोजन वृन्दावन विद्यालय इमलीभांठा में किया गया। इस अवसर पर भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक प्रो.  डा.संजीव कर्माकर मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आनंद तिवारी पौराणिक ने की।

 डा.संजीव कर्माकर ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीयता के प्रतीक थे। उनकी रचनाएं युद्घ और शांति आज भी प्रासंगिक है। अध्यक्षीय आसंदी से काव्यपाठ करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार आनंद तिवारी पौराणिक ने कहा कि सृष्टि का अस्तित्व मिटे न उजड़े न खिलता चमन। विध्वन्स नहीं निर्माण चाहिये, चाहिये युद्घ नहीं अब सिर्फ  अमन।

साहित्यकार श्रीमती एस. चन्द्रसेन ने विशेष अतिथि के रूप में कविता पाठ करते हुए कहा कि बदल रहे संस्कार यहां और बदल रहे हैं परिवेश, गुम हुई सभ्यता को ढूंढने अब कहां चला मेरा देश। छत्तीसगढ़ी में काव्य पाठ करते हुये पत्रकार उत्तरा विदानी ने  धौंरा रे बईला गली में हुंकरे..खा ले न बासी बेरा हो तो गे सुनाया। राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्घ रचना पुष्प की अभिलाषा एवं चलो सजाओ सैन्य को सुजाता विश्वनाथन द्वारा सुमधुर आवाज में प्रस्तुत किया गया।

साहित्यकार डॉ.साधना कसार ने कहा कि युद्घ में शह और मात दोनों में आंसू ..युद्घ नहीं शांति चाहिये तलवार नहीं पुष्प चाहिये पढ़ी।

 छत्तीसगढ़ी में काव्य पाठ करते हुए कवि सुरेन्द्र अग्निहोत्री आगी ने कहा कि मत बोहावव खून काकरो फ ोकटे फ ोकट मं का पाहूं। शहीदों को नमन करते हुये गीतकार सुरेन्द्र मानिकपुरी ने इक पाती तेरे नाम लिखा हूं ..अपना तुझे सलाम लिखा हूं पढ़ी। अपने साहित्यिक अंदाज में कार्यक्रम का संचालन करते हुए साहित्यकार टेकराम सेन चमक ने खूब तालियां बटोरी। उन्होंने कहा कि तेरे आंगन को किलकारियों से फिर महकाऊंगा..तू घबरा मत मां मैं फिर आऊंगा।


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