महासमुन्द

चिरायु ने असंभव को बनाया संभव: जन्म से हृदय रोग से जूझ रहा मासूम को सफ ल सर्जरी से मिला नया जीवन
30-Mar-2026 4:20 PM
चिरायु ने असंभव को बनाया संभव: जन्म से हृदय रोग से जूझ रहा मासूम को सफ ल सर्जरी से मिला नया जीवन

आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता को महंगे इलाज की संभावना नहीं थी 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 30 मार्च। महासमुंद शहर के तांडी परिवार के लिए जीवन उस समय गहरे संकट में आ गया, जब उनका 1 वर्ष 2 माह का नन्हा बेटा सिद्धार्थ तांडी एक गंभीर जन्मजात हृदय रोग से जूझता मिला। इतनी कम उम्र में ही बच्चे की नाजुक स्थिति ने परिवार को भीतर तक झकझोर दिया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण महंगे इलाज की संभावना उनके लिए लगभग असंभव थी। हर दिन चिंता और हर रात अनिश्चितता के बीच गुजर रही थी और माता-पिता के मन में बस एक ही प्रश्न था-क्या उनका बेटा स्वस्थ हो पाएगाृ?

इसी निराशा के बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शहरी चिरायु टीम आशा की किरण बनकर सामने आई। आंगनवाड़ी केंद्र में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टीम ने सिद्धार्थ की गंभीर स्थिति को तुरंत पहचान लिया। तत्परता दिखाते हुए बिना समय गंवाए उसे नि:शुल्क उपचार हेतु चिन्हित किया गया और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया शुरू कराई गई। शहरी चिरायु टीम के मार्गदर्शन में सिद्धार्थ को रायपुर स्थित नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल में रेफर किया गया। जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच उपरांत ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता बताई गई। यह क्षण परिवार के लिए बेहद भावुक और चुनौतीपूर्ण था। लेकिन इस बार उनके साथ था विश्वास, सरकारी योजना के अंतर्गत नि:शुल्क इलाज और अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख।

डॉक्टरों के कुशल प्रयास और समय पर मिले उपचार से सिद्धार्थ की सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद लगभग 10 दिनों तक उसे विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। जहां धीरे-धीरे उसकी सेहत में सुधार होने लगा। अंतत: सिद्धार्थ को पूर्णत: स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

आज वही नन्हा सिद्धार्थ अपने घर में हंसता-खिलखिलाता नजर आता है। उसकी मुस्कान अब उसके परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी बन चुकी है। जो आंखें कभी चिंता और आंसुओं से भरी थीं, आज उनमें सुकून और कृतज्ञता झलकती है। परिजन भावुक होकर कहते हैं कि यदि शहरी चिरायु टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो शायद उनका बेटा आज उनके साथ नहीं होता। इस सफलता के पीछे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. आई.नागेश्वर राव का मार्गदर्शन एवं शहरी चिरायु टीम डॉ. सुजाता शुक्ला, डॉ.विकास चौहान, चंद्रकला साहू सहित पूरी टीम का समर्पण का विशेष सहयोग रहा।


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