महासमुन्द
मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी का संकट गहराया, भावी डॉक्टरों की पढ़ाई प्रभावित
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 26 फरवरी। स्थानीय मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक सत्र की चौथी बैच प्रारंभ हो चुकी है। लेकिन विडंबना यह है कि कॉलेज में अब तक आवश्यक शिक्षण पदों की भर्तियां पूरी नहीं हो सकी हैं। स्वीकृत पदों के मुकाबले रिक्तियों का अंबार लगा हुआ है जिससे न केवल शिक्षण व्यवस्था लडख़ड़ा रही है, बल्कि वर्तमान में पदस्थ प्रोफेसरों पर उनके विषय के अलावा अन्य विषयों को पढ़ाने का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
कॉलेज के आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। शासकीय चिकिस्सा महाविद्यालय में डॉक्टरों के कुल 216 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में केवल 93 पदों पर नियमित और 31 पदों पर संविदा नियुक्तियां हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कुल 96 पद आज भी रिक्त पड़े हैं। सबसे बुरा हाल उच्च पदों का है। प्राध्यापक के 24 स्वीकृत पदों में से 17 पद खाली हैं, यानी विभाग के मुखियाओं के बिना ही कई विभाग संचालित हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में चौथी बैच आने का मतलब है कि अब प्रथम से लेकर चतुर्थ वर्ष तक के छात्रों की जिम्मेदारी कॉलेज पर है। सीनियर रेसिडेंट्स के 25 और सहायक प्राध्यापकों के 26 पद खाली होने का सीधा असर प्रैक्टिकल क्लासेस और क्लिनिकल रोटेशन पर पड़ रहा है। नियमानुसार मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी होने पर नेशनल मेडिकल कमीशन एनएमसी कॉलेज की मान्यता तक रद्द कर सकता है या सीटें कम कर सकता है।
हालात यह है कि रिक्त पदों के कारण जो प्रोफेसर अभी कार्यरत हैं, उन्हें सैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ अस्पताल की ओपीडी, प्रशासनिक काम और इमरजेंसी डयूटी भी संभालनी पस रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ते मानसिक दबाव और काम के घंटों के कारण वे छात्रों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। यदि समय रहते इन 96 रिक्त पदों को नहीं भरा गया तो आने वाले समय में यहां से निकलने वाले डॉक्टरों की गुणवत्ता और कॉलेज की साख, दोनों पर गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।
यहां की फैकल्टी में से एक सीनियर स्टाफ ने नम न छापने की शर्त पर अपनी राय दी कि राजधानी रायपुर में एक-एक विभाग में 5 से 6 असिस्टेंट प्रोफेसर हैंं। शासन इन्हें चाहे तो प्रमोशन करके महासमुंद ला सकती है। लेकिन स्थानांतरण के भय से असिस्टेंट प्रोफेसर प्रमोशन नहीं ले रहे हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज सूत्रों से मिली जाने की जानकारी के अनुसार महासमुंद में 35 सीटें इसलिए मांगी जा रही है क्योंकि पीजी के छात्र यूजी के छात्रओं को पढ़ा सकतें हैं।
ज्ञात हो कि मेकाहारा से 450 से अधिक दबाव महासमुंद मेडिकल कॉलेज पर पड़ रहा है। नियमानुसार मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी होने पर नेशनल मेडिकल कमीशन एनएमसी कॉलेज की मान्यता तक रद्द कर सकता है या सीटें कम कर सकता है।
डॉ. अलख राम वर्मा प्राध्यापक मेडिकल कॉलेज महासमुंद का कहना है कि पदों की भर्तियों के लिए शासन से पत्र व्यवहार किया गया है। इसके लिए जब तक नियमित भर्तियों नहीं हो जाती, तब तक संविदा भर्तियों किए जाने के लिए भी पत्र लिखा गया है।


