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हमारे धर्मग्रंथों की आत्मा संस्कृत को बचाने हर संभव प्रयास करेंगे-द्वारिकाधीश यादव
16-Feb-2026 3:40 PM
हमारे धर्मग्रंथों की आत्मा संस्कृत को बचाने हर संभव प्रयास करेंगे-द्वारिकाधीश यादव

छग संस्कृत शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने खल्लारी विधायक से की भेंट

राज्य में संस्कृत की दुर्दशा पर चर्चा, पाठ्यक्रम से हटाने का लगाया आरोप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बागबाहरा, 16 फरवरी। छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में संस्कृत विषय की स्थिति को लेकर खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव से उनके बागबाहरा निवास पर भेंट कर संस्कृत को संरक्षित रखने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम से कक्षा 6वीं से 10वीं तक संस्कृत विषय को सचिवालय स्तर पर हटाने की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में संघ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बिना किसी लिखित आदेश के संस्कृत के स्थान पर नवीन व्यावसायिक शिक्षा को मौखिक निर्देशों के आधार पर लागू किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक श्री यादव ने कहा कि संस्कृत हमारे धर्मग्रंथों की आत्मा है तथा भारतीय ज्ञान, परंपरा, संस्कृति और सभ्यता की आधारशिला है। उन्होंने आश्वस्त किया कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू सहित नरेश विश्वकर्मा, डॉ. नारायण साहू, रामकुमार भट्ट, शंकर लाल साहू, मनोज कुमार वर्मा, यशोदा चौहान, जयलाल गिरि एवं जीवनलाल साहू ने बताया कि संस्कृत को पूर्व की भांति अनिवार्य विषय बनाया जाए तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में स्थान दिया जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), मंडल सचिव सहित मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, विधायकों एवं कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा जा चुका है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत, हिंदी एवं बांग्ला भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाएं हैं, जिनका सम्मान और संरक्षण आवश्यक है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि हाईस्कूलों में वर्षों से पदस्थ संस्कृत के एकल शिक्षकों को अतिशेष बताकर एकतरफा स्थानांतरण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अंत में विधायक श्री यादव ने आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों के हित एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए उचित पहल की जाएगी।


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