महासमुन्द
कहीं-कहीं तो शुरू भी नहीं हुई कार्रवाई, शासन के आदेशों की अवहेलना
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 11 फरवरी। शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद महासमुंद जिले में संदिग्ध (सस्पेक्टेड) राशन कार्डों के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई कछुआ गति से चल रही है। जिले को नवंबर 2025 तक सभी संदिग्ध काडौं का निपटारा करने का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन समय-सीमा बीतने के बाद भी प्रशासनिक अमला लक्ष्य से कोसों दूर है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के केवल बसना ब्लॉक ने इस अभियान में थोड़ी सक्रियता दिखाई है। जबकि अन्य ब्लॉकों में अधिकारियों की उदासीनता के कारण हजारों अपात्र लोग सरकारी राशन का लाभ उठा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में सत्यापन की प्रक्रिया में कुछ तेजी देखी गई है और वहां लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में काम हुआ है। ठीक इसके विपरीत ग्रामीण अंचलों में जमीनी स्तर पर कार्रवाई लगभग शून्य है। बसना को छोड़ दिया जाए तो अन्य ब्लॉकों में अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण कार्य में कोई रुचि नहीं दिखाई है। जिले के गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। कई पात्र परिवार राशन कार्ड न होने के कारण अनाज से वंचित हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जब तक डेटा क्लीनिंग का यह काम पूरा नहीं होगा, नए आवेदनों पर विचार करना मुश्किल है। क्षेत्र में 5 एकड़ और उससे अधिक भूमि रखने वाले धारकों के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने की प्रक्रिया में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 1लाख,34 हजार 501 के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक केवल 26 हजार 852 मामलों पर ही कार्रवाई की जा सकी है। जबकि 99हजार 028 मामले अब भी लंबित हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 1लाख,34हजरा,501 सस्पेक्टेड राशन काडों की पहचान की गई थी। जिनके विरुद्ध जांच कर कार्रवाई की जानी थी। लेकिन अब तक जिले में मात्र 26हजार 852 काडों पर ही प्रगति दर्ज की बड़ा खामियाजा उन पात्र हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है, जो नए राशन कार्ड के लिए महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। जब तक पुराने अपात्र कार्ड निरस्त नहीं होते, तब तक नए कार्ड जारी करने की प्रक्रिया बाधित हो रही है।
जांच का मुख्य बिंदु ऐसे कार्डधारी हैं जिनके पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि है।
जिले में ऐसे 99 हजार 028 कार्ड चिह्नित किए गए हैं। ये भूमि संबंधी मानदंडों को पूरा नहीं करते, फिर भी वे राशन योजना का लाभ ले रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी चिंताजनक है। जिले के ग्रामीण इलाकों में कुल 1लाख,30 हजार 927 सस्पेक्टेड (संदिग्ध) काडों का लक्ष्य रखा गया था। जिसके मुकाबले अब तक केवल 33हजार 410 पर ही कार्रवाई हो पाई है। वर्तमान में 97हजार 517 कार्ड लंबित पड़े हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती चार ग्रामीण ब्लॉकों में स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। महासमुंद ब्लॉक में 24हजार 148 के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 909 पर काम हुआ है। जहां 23 हजार 239 मामले लंबित हैं। बागबाहरा ब्लॉक में 25 हजार 420 का लक्ष्य था। जिसमें से 2हजार 478 पर कार्यवाही पूरी हुई है। पिथौरा ब्लॉक की स्थिति सबसे चिंताजनक है और यहां 27 हजार 170 में से केवल 739 मामलों का निपटारा हुआ है।
हालांकि बसना ग्रामीण ब्लॉक ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 29हजार 321 के लक्ष्य में से 24हजार 930 पर कार्यवाही पूरी कर ली है। यहां केवल 4 हजार 391 मामले ही शेष हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण श्रेणी में 24 हजार 868 के लक्ष्य के विरुद्ध 4हजार 354 मामलों पर कार्यवाही हुई है। यदि सभी श्रेणियों के उपयोग को देखा जाए तो 1लाख,30हजार927 के भारी.भरकम लक्ष्य के मुकाबले 33हजार 410 पर कार्यवाही हुई और 97हजार 517 मामले ठंडे बस्ते में हैं। छोटी श्रेणियों में शत-प्रतिशत परिणाम भी देखेे गए हैं। उदाहरण के तौर पर 1हजार 989 के लक्ष्य बाली एक श्रेणी में सभी मामलों पर कार्यवाही पूरी कर दी गई है। वहीं 189 के लक्ष्य में 188 मामले निपटाए जा चुके हंै।


