महासमुन्द
यूनिफार्म गीली होने से बचाने के लिए उसे उतारकर हाथ में पकड़ते हैं और नाला पार करने के बाद स्कूल जाते हैं बच्चे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 25 जनवरी। सरायपाली ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत भीखापाली का आश्रित ग्राम कोकड़ी आजादी के इतने सालों बाद भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है।
सरायपाली ब्लॉक मुख्यालय से यह गांव महज 5 किमी दूर है। यहां हालात इतने बदतर हैं कि स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। वे अपनी यूनिफ ॉर्म गीली होने से बचाने के लिए उसे उतारकर हाथ में पकड़ते हैं और नाला पार करने के बाद स्कूल जाते हैं। अब ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। लिहाजा
उन्होंने प्रशासन को अंतिम अल्टीमेटम दिया है यदि 26 जनवरी तक पुल निर्माण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 27 जनवरी से उग्र आंदोलन शुरू होगा।
गांव वालों के मुताबिक पंचायत मद से खर्च कर सीमेंट की पाइप खरीदकर नाला में 100 ट्रिप मुरुम डलवाकर समतल कराया गया। लेकिन वह भी बरसात में बह गया। गांव से करीब 1 किमी दूर नाला है। वर्तमान में इस नाले में करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा है। इसी नाले को पार करके अभी भी ग्रामीण आवागमन कर रहे हंै।
जानकारी कते मुताबिक गांव में साल 2003 में भयानक बाढ़ आयी तो ग्रामीणों को गांव छोडक़र पड़ोसी गांव बालसी में आश्रय लेना पड़ा था। इसके चलते करीब 20 से ज्यादा लोगों का मकान ढह गया। उपसरपंच रंजन जांगड़े कहते हैं कि बीमार व्यक्ति को खाट में बिठाकर 10 व्यक्ति नाला पार कराते है। तब कहीं जाकर वाहन की मदद से सरायपाली स्वास्थ्य केन्द्र पहुंच पाते हैं। बरसात के दिनों में नाले में तेज पानी के बहाव के कारण शिक्षक भी गांव तक नहीं पहुंच पाते हंै। गांव के 40 बच्चे बालसी और बानीगिरहोला में मिडिल और हाईस्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिपं पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार को समस्या बताई थी। जिस पर सीईओ ने कहा कि पुल बनाने में करीब 2 करोड़ रुपए खर्च आएगा। इसके लिए मेरे पास कोई बजट नहीं है। इसे लेकर विधायक और सांसद से मिलने की बात कहकर वापस लौटा दिया।


