महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 14 फरवरी। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव समय पर नहीं होने के चलते सोसायटियों में रखे धान में सूखत आना शुरू हो गया है। इससे समितियों में प्रबंधकों सहित संचालक मंडल के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। इसके पूर्व उपार्जन के दौरान जिले में हुई सप्ताह भर बारिश से कर्मचारी धान को बचाने में हलाकान रहे। अब धूप में तेजी आते ही धान में सूखत तेजी से आई है। यदि माह के अंत तक या मार्च के पहले सप्ताह तक धान परिवहन में तेजी नहीं आती है तो सोसायटियों में सूखत से नुकसान की आशंका बढ़ जाएगी।
मालूम हो कि बीते साल कर्मचारी महासंघ की ओर से परिवहन में देरी के चलते हुए नुकसान को शासन द्वारा भरपाई किए जाने की मांग को लेकर लगभग पखवाड़े भर तक आंदोलन किया था। इसके बाद उपार्जन के बाद लेटलतीफी के कारण हुए नुकसान के लिए शासन द्वारा एकमुश्त 250 करोड़ की राशि सोसायटियों को देने कि बात कही गईं, जो कि ठंडे बस्ते में चली गई है। शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव 72 घंटे के भीतर हो जाना चाहिए, लेकिन इसका पालन कहीं नहीं हो रहा है।


