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सरकार मध्यस्थों का नाम रखें, हम जवान को रिहा करने तैयार
06-Apr-2021 9:12 PM
सरकार मध्यस्थों का नाम रखें, हम जवान को रिहा करने तैयार

4 साथियों के मारे जाने की पुष्टि के साथ लूटे गए हथियारों की तस्वीर जारी


   बीजापुर से पकड़े जवान की रिहाई पर नक्सलियों का बयान    

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दोरनापाल, 6 अप्रैल।  नक्सलियों की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी प्रवक्ता विकल्प ने बीजापुर मुठभेड़ के संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी पर मुठभेड़ से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों समेत लूटे गए हथियारों व मारे गए नक्सलियों की तस्वीर भी जारी की है।  इतना ही नहीं नक्सलियों ने केंद्र व राज्य सरकारों पर आरोप गए।

जारी पे्रसनोट में कहा है कि ‘समाधान - प्रहार’ सैनिक अभियान को जीरागुड़ेम गांव के पास पीएलजीए का मुंहतोड़ जवाब। प्यारे जनता ! 2021 अप्रैल 3 तारीख , बस्तर आईजी सुंदरराज पी का नेतृत्व में सुकमा , बीजापुर जिलों का गांवों पर भारी हमला करने के लिए 2000 पुलिस बल आ गए . 2020 अगस्त महीने में अमित शाह के नेतृत्व में दिल्ली में हुआ एक बैठक में इस सैनिक अभियान को योजना बनाया था . उसके बाद रायपुर केन्द्र बनाकर काम करने वाला के विजय कुमार के नेतृत्व में अक्टूबर महीने में पांच राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ तेलंगाना- वेंकटापुरम में हुआ बैठक में इस सैनिक अभियान का जमीनी स्तर का योजना बनाया। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. को इस सैनिक अभियान का प्रभारी बनाया। केन्द्र सरकार इस अभियान को कार्रवाई का विशेष अधिकारी के रूप में अशोक जुनेजा ( डीजीपी) को नियुक्त किया गया है।               

  2020 नवम्बर से शुरू हुआ इस सैनिक अभियान में 150 से ऊपर ग्रामीण जनता को हत्या किया . इस में कुछ हमारा पार्टी कार्यकर्ता और नेता लोग भी हैं । हजारों जनता को जेल में डाल दिया है। महिलाओं पर अत्याचार करके हत्या किया है ।जनता के धन - माल को विध्वंस किया और संपत्ति को लूट किया है। एक तरफ इस हत्याकाण्ड को बढ़ाते हुए , दूसरी तरफ पुलिस कैम्प निर्माण , कैम्प अनुशंधान करने वाल सडक़ बना रहे हैं । इसी को विकास के नाम से झूठ प्रचार कर रहे है । जन कल्याण के लिए जनता ना सरकारों ने स्कूल और हॉपिस्टल चला रहे हैं । इस स्कूल और हॉपिस्टल को इस अभियान में ध्वस्त कर रहा है . दूसरी ओर झूठ प्रचार कर रहा है कि माओवादी विकास विरोधी . पुलिस कैम्प और सरकार का विध्वंस के विरोध में हजारों संख्या में दण्डकारण्य के पैमाने पर बड़ा आंदोलन हो रहा है . स्कूल और अस्पताल मांग कर रहें हैं . पुलिस कैम्प को हटाने के लिए मांग कर रहें हैं .

मुठभेड़ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जारी की

नक्सलियों के अनुसार  2000 पुलिस बल अप्रैल 3 तारीख में एक बड़ा हमला करने के लिए जीरागुडेम गांव के पास आया है जिसमे पीएलजीए ने हमला किया है । हमला में  पुलिस के 24 जवानों को नुकसान पहुंचाया वही , 31 जवान  घायल हुए । एक जवान बंदी के रूप में हमको मिला और बाकी पुलिस वाला भाग गए . इस घटना पहले जीरागुडेम गांव का माड़वी सुक्काल को पकडक़र हत्या करके और झूठ बोल रहा है कि एक माओवादी फायरिंग में मारा गया । हमला में हमारा चार पीएलजीए  ने जान गंवाई । इसमे 1.  ओड़ी सन्नी , 2.  पदाम लखमा , 3.  कोवासी बदरू , 4.  नूपा सुरेश , लेकिन सन्नी के शव को हम नही ले पाए हैं , बाकी तीन  साथियों को  जनता के बीच में , क्रांतिकारी रीति - रिवाज के तहत अंतिम विदाई दी गई हैं इस  हमला में 14 हथियार , 2000 से ऊपर कारतूस और कुछ साजो सामान को हमारा पीएलजीए ने जप्त किए हैं ।

पर्चे में शहीद जवानों के परिवार के प्रति नक्सलियों ने खेद जताया ।

नक्सलियों द्वारा घटनास्थल से पकड़े गए कोबरा के जवान की रिहाई को लेकर असमंजस बनी हुई थी जिसपर दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने अपना स्पष्टीकरण दिया है और नक्सलियों ने मध्यस्थता के लिए सरकार को नाम देने की बात कही है सूचना : सरकार पहला निर्दिष्ट रूप से मध्यवर्तियों का नाम घोषणा करना है . उसके बाद हमारे पास बंदी के रूप में रहा पुलिस को सौंप देंगे. तब तक वह जनताना सरकार का सुरक्षा में सुरक्षित रहेगा ।

सरकार से वार्ता को लेकर कही ये बातें

वार्ता के बारे में एक शब्द - वार्ता के लिए हम कभी भी तैयार हैं सरकार ईमानदार नहीं है , पूर्व में हुआ वार्ताओं में शसस्त्र संघर्ष करने वाला कभी भी हथियार नही छोड़ा था । वार्ता करने के लिए अनुकूल महौल बनाने का जिम्मा सरकार का है । पुलिस बलों का एकात्रित करना , कैम्प बनाना , हमला करना और दमन चलाना जैसे कामों को रोक देने से वार्ता हो जाता है , वैसा न करके कोंडागांव , नारायणपुर , बीजापुर जिलों में सैनिक अभियान चला रहा है . आत्मारक्षा के रूप में प्रतिहला करना पड़ रहा है . सभी आंदोलनों को सीपीआई ( माओवादी ) नेतृत्व देते हुए , उन आंदोलनों को मिलटेंट के रूप में आगे बढ़ा रही है . जनांदोलनों के साथ - साथ जनयुद्ध को चला रहे हैं . आज देश अत्यंत कठिन परिस्थिति में है . नक्सलियों ने कहा जन सुरक्षा के लिए अमित शाह बड़ा खतरा के रूप में सामने आ गया है . सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं को निष्क्रिय करने की परिस्थिति में , कानून आंदोलन के ऊपर बर्बर दमन थोपने का परिस्थिति में , जनांदोलन और जनयुद्ध मिलजुल कर होने वाला सशस्त्र संघर्ष का रास्ता एक मात्र विकल्प के रूप में  सामने है ।

बीजापुर एसपी कमलोचन कश्यप ने इस संबंध में कहा कि नक्सली भ्रामक जानकारी दे रहे हंै। पहले भी मीनपा में  पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुई थी और उस समय नक्सलियों ने कहा था कि हमारे तीन साथी मारे गए थे। लेकिन शहीदी सप्ताह के दौरान उन्हें बताना पड़ा था कि उनके 30 से अधिक साथी मारे गए थे और आज उनके प्रेस रिलीज में 4 नक्सली मारे जाने की बात लिख रहे है लेकिन 5 नक्सलियों का फ़ोटो भेज रहे है तो कहीं न कहीं माओवादियों की बातों में विरोधाभास दिख रहा है। नक्सलियों को तर्रेम मुठभेड़ में बड़ा नुकसान हुआ है। अगस्त में जब नक्सली शहीदी सप्ताह बनाएंगे तो इसकी संख्या लगभग 10 गुना होगी। हमारे जवान बहादुरी से लड़े हंै और नक्सलियों को भी बड़ा नुकसान हुआ है।

 

 


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