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-अभिषेक कुमार
नालंदा. जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के खिलाफ कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर जमानत रद्द करते हुए गैर जमानती वारंट जारी किया गया है. गुरुवार को बिहार शरीफ व्यवहार न्यायायल के एसीजेएम वन प्रभाकर झा ने यह आदेश जारी किया. साल 2015 में दर्ज कराया गया था मामला.
दरअसल बता दें कि पूर्व जदयू नेता शरद यादव पर साल 2015 में आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगा था. इसमें उन्होंने 21 मई 2019 को आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद वे जमानत पर थे. मामला आरोप गठन के लिए लंबित चला आ रहा था.
बार-बार समय मिलने पर भी नहीं हुए उपस्थित
न्यायालय ने शरद यादव को उपस्थिति होने के लिए कई बार समय दिया लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए. इतना ही नहीं, 25 जनवरी 2021 को उपस्थित नहीं होने पर जज ने एक हजार रुपए जुर्माना करते हुए समय दिया था. बावजूद इसके वे न तो न्यायायल में उपस्थित हुए, न ही इनकी ओर से कोर्ट में किसी प्रकार की पैरवी की गयी. इस मामले में बिहारशरीफ के तत्कालीन सीओ सुनील कुमार वर्मा ने बिहार थाने में शरद यादव के खिलाफ एफआईआर करायी थी. इसमें पुलिस ने अनुसंधान के दौरान 28 दिसंबर 2015 को जमानत दी थी.
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भड़काऊ भाषण देने पर कराया गया था मामला दर्ज
सहायक अभियोजन पदाधिकारी सुरुची कुमारी ने बताया कि वर्ष 2015 में विधानसभा चुनाव के दौरान बिहारशरीफ के श्रम कल्याण केंद्र के मैदान में भाषण के दौरान धार्मिक कटाक्ष किया था. उन्होंने भाषण के दौरान कहा था, ‘अगर वादा पूरा नहीं करोगे, तो जो हिन्दू हैं स्वर्ग में नहीं जाएंगे और जो मुस्लमान हैं वो अल्लाह के पास जन्नत में नहीं जाएंगे’. इसी बात को लेकर उन पर आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था.


