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बिना दस्तावेज प्रिंटर को साढ़े 8 करोड़ भुगतान, एजी ने पकड़ी गड़बड़ी, एफआईआर की तैयारी
17-Mar-2021 2:31 PM
बिना दस्तावेज प्रिंटर को साढ़े 8 करोड़ भुगतान, एजी ने पकड़ी गड़बड़ी, एफआईआर की तैयारी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 17 मार्च।
पाठ्य पुस्तक निगम से बिना दस्तावेज के रामराजा प्रिंटर्स रावांभाठा को करीब साढ़े 8 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। इसका खुलासा महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। निगम अध्यक्ष ने प्रकाशक से इसकी पूरी जानकारी मंगाते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि जांच में जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने पत्रकारों को बताया कि निगम की सामान्य सभा की बैठक पिछले तीन साल से नहीं हो पाई थी। ऐसे में यहां निगम में ओपनिंग और क्लोजिंग बैलेंस का मिलान नहीं हो पाया था। हाल ही में महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में  इसका खुलासा होने पर संबंधित प्रकाशक रामराजा प्रिंटर्स को पत्र लिखकर इसकी पूरी जानकारी मांगी गई है। उनसे पूछा जा रहा है कि उन्हें 8 करोड़ 40 लाख का भुगतान किस काम के लिए किया गया है। 

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उनका कहना है कि अलग से बैंक-खाता खोलकर उसमेें 8 करोड़ 92 लाख रुपये ट्रांसफर किया गया। इसके बाद वहां से इस प्रकाशक को इस राशि का भुगतान कर दिया गया। निगम में इस प्रकाशक को भुगतान को लेकर कहीं कोई दस्तावेज नहीं है। ऐसे में 12 मार्च को एक पत्र लिखकर प्रकाशक से ही कार्य आदेश, चेक, मुद्रित सामग्री, उसके परिवहन आदि की जानकारी 19 मार्च तक मांगी गई है। फिलहाल उनका जवाब नहीं आया है। उनका यह भी कहना है कि प्रकाशक को काम कैसे और किस ढंग से मिला, यह भी अभी पता नहीं चल पाया है।
 
श्री त्रिवेदी ने कहा कि निगम की सामान्य सभा में आय-व्यय की पूरी जानकारी रखी जाती है, लेकिन संभवत: इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए तीन साल तक यह बैठक नहीं रखी गई। कार्यकारिणी की भी बैठक नहीं हुई। कहीं न कहीं वित्तीय अनियमितता का मामला है और इसकी पूरी जांच कराते हुए दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा यह गड़बड़ी पूर्व अध्यक्ष देवजीभाई पटेल के कार्यकाल का है, या नहीं, यह अभी पता नहीं चल पाया है। 

श्री त्रिवेदी ने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह पर पलटवार करते हुए कहा कि उनका आरोप निराधार है। आठ करोड़ 40 लाख रुपये दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय भेजने का आरोप सही नहीं है। वे अपने कार्यकाल में हुई गड़बड़ी को छिपाने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में यह भी कहा कि अगर मैंने कहीं गड़बड़ी की होगी तो मैं खुद दोषी माना जाऊंगा और उनके समय में गड़बड़ी हुई होगी, तो वे दोषी होंगे। 


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