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दो दिनी हड़ताल के पहले दिन करोड़ों का लेनदेन प्रभावित
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 15 मार्च। देश के राष्ट्रीयकृत बैंकों का निजीकरण किए जाने के केंद्र सरकार के निर्णय के विरोध में राजनांदगांव जिले में भी राष्ट्रीय बैंकों के सैकड़ों कर्मचारी हड़ताल पर रहे। दो दिनी हड़ताल के पहले दिन कारोबार पर व्यापक असर पड़ा। पहले ही दिन करीब 150 करोड़ रुपए का आर्थिक लेनदेन पर असर पड़ा है। बताया जा रहा है कि बैंक कर्मचारी केंद्र सरकार के द्वारा लगातार बैंकों का निजीकरण और विलय किए जाने की नीति को लेकर आंदोलन करने के लिए सडक़ पर लड़ाई लड़ रहे हैं।
सोमवार को स्थानीय भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य शाखा के सामने एकत्रित होकर बैंक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के विरूद्ध नारेबाजी की। राजनंादगांव जिले में करीब 600 कर्मचारी अलग-अलग राष्ट्रीयकृत बैंकों में कार्यरत हैं। निजीकरण किए जाने के निर्णय को लेकर देशभर में आज बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल से स्थानीय स्तर पर करोड़ों रुपए का व्यापारिक कामकाज प्रभावित हुआ है। युनाईटेड बैंक फोरम ऑफ इंडिया के बैनर तले हुए इस हड़ताल से व्यवसायियों को दिक्कतें हुई।
राजनंादगांव जिले में पहले दिन 150 करोड़ रुपए का व्यापार चौपट हुआ है। पिछले दो दिनों से बैंकों की सरकारी छुट्टी रही है। आज से शुरू हुए दो दिनी हड़ताल के चलते लोगों की मुसीबतें बढ़ी है।
इस संबंध में बैंक यूनियन के जिला सचिव सतीश चौधरी ने ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि एक सूत्रीय मांग के तहत यह हड़ताल हुआ है। संघ निजीकरण किए जाने के निर्णय को लेकर आंदोलनरत हैं। जिले के सभी राष्ट्रीकृत बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताली बैंककर्मियों का दावा है कि बीते एक दशक में बैंकों के जरिये एक लाख 74 हजार 336 करेाड़ रुपए का मुनाफा सरकार को हुआ है। ऐसे में घाटा का हवाला देकर बैंकों का निजीकरण किया जाना अनुचित है। हड़ताली कर्मियों ने यह भी मांग की है कि निजी क्षेत्रों को बढ़ावा देने की नीतियों को सीधे खत्म किया जाए। जिससे बैंकों की हिस्सेदारी कम न हो। पहले दिन के हड़ताल से जरूरतमंद लोगों को बैंक के पास भटकते हुए भी देखा गया। वहीं बाजार में कैश की भी भारी किल्लत रही। बताया जा रहा है कि दूसरे दिन के हड़ताल से नुकसान दोगुना हो सकता है।


