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कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद कच्चे तेल के दाम पहली बार 70 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच चुके हैं. वहीं, ऐसा अनुमान है कि दुनिया में सबसे अधिक कच्चा तेल आयात करने वाले देश चीन ने हाल के महीनों में ईरान से रिकॉर्ड ख़रीदारी की है.
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ईरान ने अपने सबसे बड़े उपभोक्ता चीन को बीते महीनों में रिकॉर्ड कच्चा तेल निर्यात किया है.
भारत भी ईरान से तेल आयात करने की अपनी सालाना योजना में बढ़ोतरी की तैयारी कर रहा है. ऐसा इसलिए समझा जा रहा है क्योंकि ऐसी संभावना है कि अमेरिका ईरान पर अपने प्रतिबंधों में ढील दे सकता है.
साल 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते से निकलने की घोषणा की थी लेकिन वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ईरान के साथ बातचीत जारी रखना चाहते हैं.
हालांकि, अमेरिका फ़िलहाल ईरान पर कड़े प्रतिबंधों में ढील देने की नहीं सोच रहा है. वहीं ईरान की मांग है कि जब तक प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे तब तक बातचीत शुरू नहीं होगी.
रॉयटर्स सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बाइडन प्रशासन के सत्ता संभालने के बाद ईरान की सरकारी तेल कंपनी नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (एनआईओसी) ने अपने कच्चे तेल का बाज़ार तलाश करने के लिए एशियाई उपभोक्ताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया था.
2018 के आख़िर में प्रतिबंधों के बाद ईरान के चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया निर्यात किए जाने वाले कच्चे तेल में ज़बरदस्त गिरावट दर्ज की गई थी.
इसके कारण एशिया में सप्लाई होने वाले कच्चे तेलों में भी गिरावट देखी गई क्योंकि एशिया अपना आधे से अधिक कच्चा तेल मध्य-पूर्व से आयात करते हैं.
रॉयटर्स ने एक भारतीय रिफ़ाइनरी कंपनी के सूत्र के हवाले से कहा है कि ईरान ने उनसे बात की है और बहुत जल्द तेल की सप्लाई बहाल हो जाएगी.
वहीं एक अन्य भारतीय रिफ़ाइनरी कंपनी का कहना है कि उनकी एनआईओसी के अधिकारियों से बात हुई है और जून में ईरान में चुनाव के बाद कच्चे तेल की सप्लाई के लिए आधिकारिक समझौता हो पाएगा.
एनआईओसी एशिया के अपने दूसरे उपभोक्ताओं के पास भी पहुंचा है. (bbc.com)


