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नाराज प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा मंत्री ने अध्यक्ष को वाट्सअप में भेजा इस्तीफा
09-Mar-2021 11:42 AM
नाराज प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा मंत्री ने अध्यक्ष को वाट्सअप में भेजा इस्तीफा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 9 मार्च।
भाजपा के अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं है। हालिया प्रदेश भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा में हुई नियुक्ति में प्रदेश मंत्री मनोनीत हुए राजनांदगांव के सावन वर्मा ने प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सोनी को वाट्सअप में अपना इस्तीफा भेज दिया है। पार्टी से वह इतने नाराज हैं कि उन्होंने इस्तीफा भेजने के लिए वाट्सअप को जरिया बनाया। बताया गया है कि वर्मा प्रदेश मंत्री पद मिलने से नाखुश थे। 

प्रदेश स्तर पर भाजपा के मोर्चों में हुई नियुक्ति से नाराज होकर इस्तीफा देने का यह संभवत: पहला मामला है। वह राजनांदगांव भाजपा के महामंत्री भी रहे हैं।  वर्मा पिछड़ा वर्ग से ताल्लुकात रखते हैं। राजनीतिक रूप से वह बड़े पद की उम्मीद लगाए हुए थे। वह राजनांदगांव जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष बनने के लिए जोर लगा रहे थे। संगठन ने उन्हें प्रदेश में जगह दी। इस नियुक्ति के बाद से भाजपा के भीतर उनकी नाराजगी की खबरें सामने आ रही थी। महामंत्री जैसे ओहदे में रहने के कारण वर्मा को पार्टी से दमदार पद मिलने का पूरा भरोसा था। 

बताया जा रहा है कि सावन वर्मा की नाराजगी से राजनांदगांव जिले के आला नेता भी वाकिफ थे। उनकी कई नेताओं से अनबन भी थी। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और पूर्व सांसद अभिषेक सिंह के नजदीकी होने के कारण श्री वर्मा को संगठन में उचित पद मिलने की उम्मीद थी। गत् 27 फरवरी को उन्होंने प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष सोनी को वाट्सअप में पारिवारिक कारणों का हवाला देकर त्यागपत्र देने की सूचना भेजी। 

इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष श्री सोनी ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि वाट्सअप से उनका इस्तीफा मिला है, जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों के चलते पद में कार्य करने असमर्थता जाहिर की है। उधर वर्मा के इस्तीफे की खबर कुछ आला नेताओं तक पहुंच गई है। चर्चा है कि वर्मा मोर्चा के बजाय प्रमुख पद नहीं मिलने से आहत थे। प्रदेश मंत्री पद को राजनीतिक रूप से वह अपने कद के मुताबिक कमतर आंक रहे थे।

बताया जा रहा है कि नियुक्ति के पश्चात से वह पार्टी हल्के में अपनी नाराजगी को बार-बार जाहिर कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह से भी उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से भेंट कर नाराजगी जताई थी। भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकाल में वर्मा को जातिगत समीकरण के तहत जिला महामंत्री पद पर नियुक्त किया गया था। उनका दावा रहा है कि अनुभव और समर्पण की काबिलियत को संगठन ने नहीं परखा, जिसके चलते उन्हें लो प्रोफाइल वाले पद पर मनोनीत किया गया। पद से इस्तीफा देने के फैसले को पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है। 


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