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सीएम ने कहा-जितने की सहमति मिली थी उतने भी नहीं दिए
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 8 मार्च। प्रदेश में बारदाना खरीद को लेकर सोमवार को विधानसभा में जमकर बहस हुई। सरकार के इस जवाब पर कि केन्द्र सरकार द्वारा बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जाता है, विपक्षी भाजपा सदस्यों ने सहकारिता मंत्री को आड़े हाथों लिया, और केन्द्र सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार किया, और कहा कि धान खरीद वाले राज्यों के साथ बैठक कर जूट कमिश्नर बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि जितने गठान बारदाने की सहमति मिली थी, उतने बारदाने भी उपलब्ध नहीं कराए गए। बावजूद इसके किसानों से बारदाना लेकर प्रदेश में रिकार्डतोड़ 92 लाख टन से अधिक धान खरीद की गई है।
प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और रजनीश कुमार सिंह के जवाब में सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जाता है। समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन कार्य के लिए खरीफ वर्ष के लिए केन्द्र सरकार द्वारा लागत पत्रक जारी किया जाता है। इस लागत पत्रक के आधार पर चावल जमा करने का चावल की राशि प्राप्त होती है, जिसमें बारदाना की दर शामिल है।
नेता प्रतिपक्ष श्री कौशिक ने कहा कि सरकार ने माना है कि केन्द्र सरकार बारदाना उपलब्ध नहीं कराती है। बावजूद इसके पूरी सरकार हाय तौबा मचा रही थी। केन्द्र सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने पूछा कि कितने गठान बारदाने की जरूरत थी, और कितना प्राप्त हुआ? सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि साढ़े तीन लाख से अधिक गठान बारदाने की जरूरत थी, और 1 लाख 45 हजार गठान बारदाना उपलब्ध कराया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि धान खरीदी के लिए 4 लाख गठान बारदाने की जरूरत थी, तो 1 लाख 45 हजार बारदाने का ऑर्डर क्यों दिया गया? इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि हर साल धान उत्पादक राज्यों की जूट कमिश्नर के साथ बैठक होती है। इसमें राज्य की डिमांड के आधार पर बारदाने की आपूर्ति पर चर्चा होती है।
उन्होंने कहा कि जूट कमिश्नर ने बारदाने की उपलब्धता पर बताया कि कोरोना की वजह से जूट मिलें बंद हैं। ऐसे में राज्य से कम कर बारदाने का प्रस्ताव देने के लिए कहा था। जूट कमिश्नर के साथ चर्चा में 1 लाख 45 हजार गठान बारदाना देने पर सहमति बनी थी। उन्होंने बताया कि जितने गठान बारदाना उपलब्ध कराने की सहमति बनी थी, उतना बारदाना आज तक उपलब्ध नहीं कराया गया। बावजूद इसके किसानों से बारदाने और मिलर्स से बारदाने लेकर रिकार्डतोड़ 92 लाख मीट्रिक टन बारदाने की खरीद की गई।
पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि क्या जूट कमिश्नर से बारदाना लेने की बाध्यता है? इसके जवाब में सहकारिता मंत्री ने बताया कि पूर्व से जूट कमिश्नर के माध्यम से बारदाना लेने की परम्परा चली आ रही है। डॉ. प्रेमसाय सिंह ने पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के सवाल के जवाब में बताया कि 20 से 21 रूपये की दर से बारदाने की खरीदी की गई है।


