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एमएमआई में जंग, सुरेश गोयल के धड़े ने करोड़ों की अनियमितता का लगाया आरोप, जवाब मांगा
31-Jan-2021 1:47 PM
एमएमआई में जंग, सुरेश गोयल के धड़े ने करोड़ों  की अनियमितता का लगाया आरोप, जवाब मांगा

   धाड़ीवाल ने कहा-प्रकरण अदालत में चल रहा है, नोटिस का वैल्यू नहीं  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 31 जनवरी।
एमएमआई हॉस्पिटल ट्रस्ट के सदस्यों के बीच एक बार फिर विवाद छिड़ गया है। बताया गया कि ट्रस्ट के सचिव राम अवतार अग्रवाल ने पूर्व पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर हॉस्पिटल ट्रस्ट में करोड़ों की अनियमितता पर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। 

एमएमआई हॉस्पिटल ट्रस्ट के सचिव राम अवतार अग्रवाल के नोटिस के बाद ट्रस्ट में विवाद गहरा गया है। ट्रस्ट पर पहले लूनकरण श्रीश्रीमाल, महेन्द्र धाड़ीवाल और प्रदीप गुप्ता काबिज थे। बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुरेश गोयल गुट हावी हो गए। गोयल चेयरमैन और राम अवतार अग्रवाल फिर सचिव के रूप में काम करना शुरू कर दिया है। 

राम अवतार अग्रवाल ने श्रीश्रीमाल और अन्य को 29 जुलाई 2020 से 5 जनवरी 2021 के बीच हॉस्पिटल ट्रस्ट में अनियमितता पर जवाब मांगा है। हालांकि महेन्द्र धाड़ीवाल ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि मौजूदा पदाधिकारियों की नोटिस का कोई वैल्यू नहीं है। सारा मामला अदालत में विचाराधीन है। इस अवधि में श्रीश्रीमाल अध्यक्ष, और प्रदीप गुप्ता सचिव के पद पर थे। नोटिस में यह कहा गया कि आपके द्वारा एमएमआई के सुगम संचालन के लिए किसी भी तरह का सहयोग नहीं किया गया, बल्कि निरंतर बाधाएं, भ्रम फैलाया जा रहा है। 

यह भी कहा गया कि समिति के कर्मचारी दबाव में काम नहीं कर रहे हैं। जिससे नियमित कामकाज और जांच में अवरोध हो रहा है। एकाउंटेंट  द्वारा बड़ी मुश्किल से एकाउंटेंट डिपार्टमेंट के कम्प्यूटर का पासवर्ड संस्था के अध्यक्ष सुरेश गोयल को बताया गया। जांच में यह भी पता चला है कि  कैश अकाउंट बुक में बैक डेट में इंट्री कर खर्च बढ़ाए गए। ताकि समिति की नगद राशि बैलेंस कम करके गबन कर सके, और इसका दोष हमारे ऊपर मढ़ सके। 

आगे यह भी कहा गया कि समिति के कम्प्यूटर पर बने एकाउंट के मुताबिक 13 करोड़ 80 लाख का बचत दर्शाया गया। उपरोक्त कैश खाता आपके द्वारा संचालित किया गया है, किन्तु यह राशि कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। यह पता चला है कि यह राशि महेन्द्र धाड़ीवाल और प्रदीप गुप्ता द्वारा अपने पास रखी गई है। 6 दिसम्बर 2020 से 4 जनवरी 2021 के खर्च और आवक का ब्योरा कैश में दर्ज नहीं है। 

नोटिस में यह भी कहा गया कि समिति के फंड का अत्याधिक दुरूपयोग किया गया है, और नियमों को ताक पर रखकर अनाप-शनाप राशि बाटी गई हैं। वकीलों पर लाखों रूपए खर्च किए गए हैं, लेकिन ये वकील हाईकोर्ट में डॉ. हरख जैन के पक्ष में, और एमएमआई समिति के विरूद्ध पैरवी की है। इसलिए उन्हें एमएमआई द्वारा भारी भरकम फीस दिया जाना अत्यंत आपत्तिजनक, और यह गबन की श्रेणी में आता है।
 
यह भी पता चला है कि समिति के सदस्य लूनकरण पारख को 1 लाख 20 हजार, 50-50 हजार के दो चेक जारी किए गए हैं। जिसका कोई विवरण उपलब्ध नहीं है। नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा कल्चर फंड की बचत राशि प्राचार्य के माध्यम से आप लोगों द्वारा जमा किया गया। वह राशि खाते में नहीं है। आपके कार्यकाल में एकाउंट और क्रय विक्रय संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच के लिए सीए से विशेष ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया जा रहा है। जो भी गड़बड़ी सामने आएगी। उसे सूचित किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


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