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द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक, भारत चीन पर निर्भरता कम करने के लिए लंबी रणनीति पर काम कर रहा है, लेकिन अभी भी 'क्रिटिकल आइटम्स के लिए चीन सबसे बड़ा स्रोत' बना हुआ है.
ख़बर में कहा गया है कि मोबाइल फ़ोन कंपोनेंट्स से लेकर दवाओं के लिए ज़रूरी घटकों की आपूर्ति के लिए भारत की चीन पर निर्भरता बनी हुई है जो असंतुलित व्यापार से कहीं अधिक बड़ी चिंता है.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव संजय चड्ढा ने ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ़ चाइना स्टडीज़ में कहा है कि "व्यापार घाटा डॉलर्स में नहीं बल्कि ज़रूरत से ज़्यादा निर्भर होने में है."
उनका कहना है, "किसी भी मोबाइल में इस्तेमाल होने वाला 85 प्रतिशत सामान एक ही देश से आ रहा है. यदि चीन ने पेनिसिलीन के लिए ज़रूरी घटक देना बंद कर दिया तो हम अपने देश में पेनिसिलीन भी नहीं बना पाएंगे."
उन्होंने कहा कि भारत इससे निजात पाने के लिए कई उपाय कर रहा है जिनमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स से लेकर घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना भी शामिल है.
ख़बर में कहा गया है कि भारत अभी भी सबसे अधिक आयात चीन से कर रहा है, हालाँकि पिछले साल इसमें 10.8 प्रतिशत की गिरावट आई है जो साल 2016 के बाद सबसे कम रहा.
(bbc.com)


