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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 23 जनवरी। छत्तीसगढ़ किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा सहित छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन से जुड़े सैकड़ों किसान आज यहां कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन के बाद दिल्ली रवाना हुए। इसके पहले प्रदेश के किसानों ने नए कृषि कानून के विरोध में कई जगहों पर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। बताया गया कि प्रदेश के ये सभी किसान दिल्ली में किसान गणतंत्र परेड में शामिल होंगे।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने बताया कि ज्ञापनों के जरिये केंद्र सरकार से कॉर्पोरेटपरस्त और किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लेने और फसल की सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का कानून बनाने की मांग की गई है। ज्ञापन कोरबा, सूरजपुर, सरगुजा, रायगढ़, बस्तर, राजनांदगांव, धमतरी, मरवाही, बिलासपुर सहित कई जिलों में राज्य सरकार के स्थानीय अधिकारियों को सौंपे गए हैं। ज्ञापन देने से पूर्व कई स्थानों पर धरने, प्रदर्शन और सभा भी आयोजित किए गए। ज्ञापन सौंपने के बाद सैकड़ों किसान और ग्रामीण जन दिल्ली रवाना हो रहे हैं, जहां वे किसान गणतंत्र परेड में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी सरकारी कार्यक्रमों के बाद किसान गणतंत्र परेड आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा इन कानूनों के अमल पर डेढ़ साल तक रोक लगाने के प्रस्ताव को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि संविधान सरकार को संसद द्वारा पारित किसी कानून पर रोक लगाने का अधिकार ही नहीं देता, इसलिए यह प्रस्ताव धोखेबाजी है और इन कानूनों की वापसी ही एकमात्र विकल्प है। इस आंदोलन में डेढ़ सौ से ज्यादा किसानों ने अपनी शहादत दी है और अंतिम सांस तक खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले इन कॉर्पोरेटपरस्त कानूनों के खिलाफ देश के किसान और अवाम मिलकर संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि निजी मंडियों के अस्तित्व में आने के बाद और खाद्यान्न व्यापार को विश्व बाजार के साथ जोडऩे के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य की पूरी व्यवस्था ही ध्वस्त हो जाएगी। इसलिए मोदी सरकार को अपने आश्वासन से ऊपर उठकर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का कानून बनाना चाहिए, जिसमें कम कीमत पर खरीदने वाले को सजा का भी प्रावधान हो।


