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पुलिस पर संचालक को बचाने बयान बदलवाने का आरोप लगाया पीड़ित युवतियों ने
राजेश अग्रवाल
बिलासपुर, 20 जनवरी ('छत्तीसगढ़' संवाददाता) । सरकंडा स्थित उज्ज्वला होम के संचालक पर वहां हुए हंगामे के बाद छूटकर निकली युवतियों ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। वहां की महिलाओं पर भी शारीरिक प्रताड़ना और नशे की दवा देने का गंभीर आरोप लगाया गया है। उनका आरोप है कि पुलिस को उन्होंने यह शिकायत की थी पर दबाव डालकर बयान बदल दिया गया। उज्ज्वला होम का रायपुर से आई अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण किया और यहां रह रही 10 महिलाओं को अन्यत्र शिफ्ट कर किया जा रहा है।
दो दिन पहले एक युवती घर वालों से नाराज होकर घर से निकल गई थी। उसे एक महिला रहने और नौकरी का आश्वासन देकर उज्ज्वला होम में छोड़ आई थी। उसका पति जब इस युवती को लेने अपने परिवार के साथ पहुंचा तो उसे छोड़ने से मना करने पर उज्ज्वला की वार्डन के साथ विवाद हो गया था। तब पति और उसके साथ आये लोग हॉस्टल के भीतर घुस गये। यहां की दो अन्य युवतियों ने इन युवकों से प्रताड़ना व दुष्कर्म की शिकायत की थी। इन तीनों युवतियों को सरकंडा थाना लाया गया था जहां सीएसपी निमिषा पांडेय ने उनका बयान लिया था। पांडेय ने बताया कि था कि तीनों युवतियों ने दुष्कर्म और यौन शोषण का कोई आरोप नहीं लगाया है। उनके बयान की वीडियोग्रॉफी कराई गई है, हालांकि उन्होंने प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ अश्लील गाली गलौच, परिसर में प्रवेश करने के मामले में अपराध दर्ज किया है, जिनमें संचालक जितेन्द्र मौर्य का नाम भी है।
बिलासपुर प्रेस क्लब में मंगलवार की शाम इन युवतियों ने पत्रकारों के समक्ष आरोप लगाया कि वहां सेक्स रैकेट चलाया जाता है युवतियों को रात में ले जाया जाता है। इन में से एक तीन माह पहले हुए एक सामूहिक दुष्कर्म की शिकार युवती है। उसने पत्रकारों से कहा कि मौर्य ने उसके साथ गलत काम किया। उसे युवकों के साथ बाहर भेजने की कोशिश की और मना करने पर निर्वस्त्र कर एक कमरे में बंद कर दिया गया। दूसरी युवती भी अपनी मां के साथ विवाद होने के बाद यहां पहुंची थी, उसने भी आरोप लगाया कि मौर्य ने उसे गलत तरीके से छूता है। हॉस्टल में काम करने वाली नीलम खूंटे कहती है कि इनको लड़कों की जरूरत है। उन्हें खाने में नशा मिलाकर दिया जाता है। रात में गहरी नींद आ जाती है और सुबह हाथ-पैर दर्द करता है।
इन युवतियों ने बताया कि यह सब बात पुलिस को उन्होंने बताया किन्तु बड़ी मैडम ने हमें कहा कि हमें इतना ही बोलना है, जिसमें दुष्कर्म और शारीरिक शोषण व नशे की दवा वाली बात नहीं दर्ज हुई।
इन तीनों युवतियों ने हॉस्टल में जबरदस्ती रखे जाने का आरोप लगाया। इन्होंने पुलिस के समक्ष कह कि वे अपने परिजनों के पास जाना चाहती हैं, तो उन्हें छोड़ दिया गया। इन युवतियों का कहना है कि वे स्थानीय हैं और परिवार के लोग रखने के लिये तैयार हैं, इसलिये वहां से निकल पाईं लेकिन वहां 10 लड़कियां हैं जो इसी प्रकार के अत्याचार को सह रही हैं।
मामला सामने आते ही राज्य महिला आयोग ने जिला पुलिस व महिला एवं बाल विकास विभाग से पूरी रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद रायपुर से एक जांच टीम मंगलवार को यहां पहुंची जिसमें महिला बाल विकास विभाग की डायरेक्टर दिव्या मिश्रा, सहायक संचालक नेहा राठिया व भगत शामिल थीं। जानकारी मिली है कि वहां रह रही महिलाओं से अलग-अलग बयान लिया गया। इसके बाद हॉस्टल को बंद करा दिया गया है और युवतियों को अलग-अलग दूसरे शेल्टर होम में शिफ्ट किया जा रहा है।
महिला विभाग व पुलिस का संरक्षण ?
उज्ज्वला होम मे रविवार की रात हुए हंगामे के बाद कई परतें खुल रही हैं। जानकारी मिली है कि इसे केन्द्र से अनुदान पहले मिलता था लेकिन अब यह बंद हो चुका है। इसके बावजूद यह केन्द्र चलाया जा रहा है। यह सवाल उठ रहे हैं कि सेंटर का खर्च कैसे निकाला जा रहा है। सेंटर के प्रति महिला एवं बाल विकास विभाग व पुलिस की मेहरबानी रही है। पहले भी इसके बारे में शिकायतें आ चुकी हैं। एक महिला ने शिकायत की थी कि उसकी बेटी अचानक घर से लापता हो गई थी, जिसकी शिकायत उसने पुलिस में की थी। तलाश करने पर वह उज्ज्वला होम में मिली, जहां उसे बेटी को छुड़ाने के लिये 15 हजार रुपये मांगे गये।
बारीकी से जांच करेंगे- पुलिस
पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि युवतियों ने पुलिस के समक्ष ऐसी कोई शिकायत नहीं की। वे अपना नाम भी नहीं बता रही थीं। यदि हमें लिखित शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जायेगी। एएसपी उमेश कश्यप ने कहा कि सेंटर के बारे में कई गंभीर शिकायतें हैं, पुलिस गहराई से आरोपों की जांच कर रही है।


